Bhasha kise kahate hain in Hindi with example

भाषा किसे कहते है (Bhasha kise kahate hain) यह अलग अलग विद्वानों के द्वारा उनकी अपनी अपनी विचार धारणाये है आज हम अपने इस लेख के अंदर इन्ही सभी विद्वानों के विचारो को आपके साथ साँझा करेंगे।

भाषा शब्द संस्कृत के भाष धातु से बना है। जिसका अर्थ है- बोलना।

दोस्तों क्या आप जानते है कुल 6809 भाषाएं पुरे विश्व में बोली जाती है

आज हम भाषा के इन निम्न लिखित बिन्दुओ पर जानकारी सांझा करेंगे

  • भाषा क्या है तथा भाषा की परिभाषा क्या है ?
  • भाषा के भेद/रूप कितने है
  • तथा भाषा के प्रकार
  • उपभाषा या बोली किसे कहते है
  • लिपि क्या है

इत्यादि विषयो पर हम आपके साथ इस लेख में जानकारी साँझा करेंगे।

तो चलिए इस लेख को शुरू करते है।

Table of Contents

Bhasha kise kahate hain (भाषा किसे कहते हैं)

भाषा के द्वारा हम अपने विचारों को व्यक्त कर सकते हैं और इसके लिये हम वाचिक ध्वनियों का प्रयोग करते हैं।

या

भाषा, मुख से उच्चारित होने वाले शब्दों और वाक्यों आदि का वह समूह है जिनके द्वारा मन की बात बताई जाती है।

भाषा की परिभाषा ;-

जिस साधन के द्वारा कोई भी जीव या निर्जीव वस्तु/प्राणी अपने विचारो या भावनाओ को किसी और तक पहुंचाता है। उस साधन को भाषा कहते है।

या

कई तरह के ध्वनि जब किसी सार्थक शब्द का निर्माण करते है और वह शब्द जब किसी वाक्य का निर्माण करते है तब किसी भाषा का निर्माण होता है

या

अपने विचारो को जिस ध्वनि के द्वारा दूसरे तक पहुंचाते है वह भाषा कहलाती है।

या

ए. एच. गार्डिबर का मंतव्य है-

“The common definition of speech is the use of articulate sound symbols for the expression of thought.”

अर्थात् विचारों की अभिव्यक्ति के लिए जिन व्यक्त एवं स्पष्ट भ्वनि-संकेतों का व्यवहार किया जाता है, उनके समूह को भाषा कहते हैं।

डॉ शयामसुन्दरदास के अनुसार: – मनुष्य और मनुष्य के बीच वस्तुओ के विषय अपनी इच्छा और मति का आदान प्रदान करने के लिए व्यक्त ध्वनि-संकेतो का जो व्यवहार होता है, उसे भाषा कहते है।

किसी भी भाषा के केवल 2 आधार है

  • मानसिक आधार
  • भौतिक आधार

मानसिक आधार में किसी भी प्रकार की ध्वनि नहीं होती है यह भाव भी कहलाते है जबकि भौतिक आधार में ध्वनि होती है इसे भाषा या शब्द भी कहते है।

ध्यान देने योग्य बातें ;-

यदि आप एक सही और अच्छे वार्ताकार बनाना चाहते है तो आपको नीचे दिए गए निम्नलिखित नियमो का पालन करना चाहिए।

छोटी-छोटी भूलों पर सूक्ष्म दृष्टि रखनी चाहिए और उन सभी भूलो को दूर करने के लिए प्रयत्नशील रहना चाहिए। चाहे जहाँ पर भी हों अपनी भाषा का ही इस्तेमाल करे इससे आपके भाषा की सीमा का विस्तार होगा ।

इसके साथ ही आपको दूसरों की भाषा पर भी ध्यान देकर भी सीखना चाहिए ।

विशेषकर बच्चों की भाषा पर जरूर ध्यान देना चाहिए जिससे की उनके द्वारा की जाने वाली गलतियों को सुधारा जा सके और कभी कभी वह गलतिया हम भी कर देते है

तो इनके जरिये ही हमे भी सीख मिल सकती है। यदि हम उनकी भाषा को शुरू से ही व्यवस्थित रूप देने में सफल होते हैं तो निश्चित रूप से उसका (भाषा का) वातावरण तैयार होगा।

आपको सदा अच्छी व ज्ञानवर्द्धक पुस्तकों को हमेशा प्रतिदिन पढ़ते रहना चाहिए जिससे आपको उस भाषा के सब्दो का ज्ञान का विकास होगा और आपकी वह भाषा और अच्छी हो सकेगी।

इसके साथ ही आप उन पुस्तकों में लिखे नये शब्दों के अर्थों एवं प्रयोगों को सीखें और उन पर अम्ल करे । इसके साथ साथ आप हमेशा लिखने एवं बोलने की शैली सीखते रहना चाइये।

भाषा के विविध रूप:

हर देश में भाषा के तीन रूप मिलते है:

  • बोलियाँ
  • परिनिष्ठित भाषा
  •  राष्ट्र्भाषा

1. बोलियाँ :- जिन स्थानीय बोलियों का प्रयोग साधारण अपने समूह या घरों में करती है, उसे बोली (dialect) कहते है।

किसी भी देश में बोलियों की संख्या अनेक होती है। ये घास-पात की तरह अपने-आप जन्म लेती है और किसी क्षेत्र-विशेष में बोली जाती है। जैसे- भोजपुरी, मगही, अवधी, मराठी, तेलगु, इंग्लिश आदि।

2. परिनिष्ठित भाषा :- यह व्याकरण से नियन्त्रित होती है। इसका प्रयोग शिक्षा, शासन और साहित्य में होता है। बोली को जब व्याकरण से परिष्कृत किया जाता है,

तब वह परिनिष्ठित भाषा बन जाती है। खड़ीबोली कभी बोली थी, आज परिनिष्ठित भाषा बन गयी है, जिसका उपयोग भारत में सभी स्थानों पर होता है।

3. राष्ट्र्भाषा :- जब कोई भाषा किसी राष्ट्र के अधिकांश प्रदेशों के बहुमत द्वारा बोली व समझी जाती है, तो वह राष्टभाषा बन जाती है। भारत की राष्ट्रभाषा हिंदी है।

दूसरे शब्दों में- वह भाषा जो देश के अधिकतर निवासियों द्वारा प्रयोग में लाई जाती है, राष्ट्रभाषा कहलाती है।

सभी देशों की अपनी-अपनी राष्ट्रभाषा होती है; जैसे- अमरीका-अंग्रेजी, चीन-चीनी, जापान-जापानी, रूस-रूसी आदि।

भाषा के भेद या रूप

भाषा के 3 भेद होते हैं किन्त्तु मुख्य रूप से भाषा के दो रूप है इन सभी की अपनी अपनी विशेषताएं है

  1. लिखित भाषा
  2. मौखिक भाषा
  3. सांकेतिक भाषा –

1. लिखित भाषा ;-

अपने विचारो को किसी खास चिन्ह के जरिये लिख कर दर्शाना ही लिखित भाषा कहलाती है ?

इस तरह के भाषा का इस्तेमाल तब किया जाता है जब सुनने वाला या समझने वाला व्यक्ति कही दूर इलाको में हो।

आज के समय में इस्तेमाल होने वाले massaging app इसके लिए एक अच्छा उदहारण हो सकता है।

2. मौखिक भाषा ;-

इस तरह की भाषा का उपयोग करते समय किसी न किसी प्रकार की ध्वनि का इस्तेमाल करना होता है जिसके जरिये हम एक सार्थक शब्द का निर्माण करके अपने विचारो को किसी दूसरे तक पहुंचते है।

भाषा का यह रूप अधिकतर ही इस्तेमाल किया जाता है।

यह सबसे आधिक् इस्तेमाल किया जाने वाला किसी भी भाषा का प्रारूप है मौखिक भाषा में वह सभी भाषाओ को लिया जाता है.

उदहारण के लिए;-

  • मौखिक भाषा का सबसे अधिक प्रयोग नाटकों में होता है। जैसे नाटक भाषण, फ़िल्म समाचार सुनना आदि।
  • जैसे क्रिकेट के मैदान में स्पीकर खेल की गतिविधियों को बोल कर बताता है. ये मौखिक भाषा का ही उदाहरण है.
  • जब किसी क्लास में किसी अध्यापक और किसी छात्र के बीच कोई माधयम के जरिये अध्यापक अपनी बातो को अपने छात्र तक किसी न किसी माध्यम के जरिये पहुँचता है
  • तो उसी माध्यम को भाषा कहते है किन्तु यदि वह अध्यापक अपने छात्र को मुँह के द्वारा ध्वनि निकालकर जिसका अर्थ पूर्ण रूप से सार्थक हो के जरिये अपनी बात रखता है
  • तो यह प्रक्रिया ही मौखिक भाषा कहलएगी जिस ध्वनि का प्रयोग किया गया है वही ध्वनि ही मौखिक भाषा का अच्छा उदाहरण होगी

मौखिक भाषा की कुछ प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं-

  • यह भाषा का अस्थायी रूप है।
  • उच्चरित होने के साथ ही यह समाप्त हो जाती है।
  • वक्ता और श्रोता एक-दूसरे के आमने-सामने हों प्रायः तभी मौखिक भाषा का प्रयोग किया जा सकता है।
  • इस रूप की आधारभूत इकाई ‘ध्वनि’ है। विभिन्न ध्वनियों के संयोग से शब्द बनते हैं जिनका प्रयोग वाक्य में तथा विभिन्न वाक्यों का प्रयोग वार्तालाप में किया जाता हैं।
  • यह भाषा का मूल या प्रधान रूप हैं।

3. सांकेतिक भाषा –

जब कोई अपनी बातो या मन की व्यथा को अपने संकेतो के द्वारा बताये तो यह सांकेतिक भाषा कहलाती है

यह एक ऐसी भाषा है जो की सभी भाषाओ से सहज है इसमें शब्द या वाचिका या किसी भी प्रकार की ध्वनि का उपयोग नहीं किया जाता है

सांकेतिक भाषा को कई विद्वान भाषा नहीं मानते है उनका मानना है की संकेत केवल एक भाव है जो की सांकेतिक रूप से व्यक्त किया जाता है।

उदाहरण के लिए ;-

जब कोई माँ अपने बच्चे से बात कराती है तो वह बच्चा इतना अबोध होता है की उसे उसकी माँ संकेतो के द्वारा अपनी बात बताती है जिससे और उत्तर स्वरूप वह बच्चा भी अपने माँ को इशारे में ही कुछ बताने का प्रयत्न करता है

माँ और बच्चे के बीच इसी प्रसंग को बात करना कहते है यानि की अपने विचार दुसरो तक पहुंचना। किन्तु इसके लिए यहाँ पर किसी मध्यम के जरिये यह पूर्ण हुआ है जो की भाषा कहलाती है

किन्तु यहाँ पर दोनों के बीच में एक संकेत के द्वारा बात हुयी है तो वह भाषा सांकेतिक भाषा के तौर पर जानी जाएगी।

भाषा का उपयोग या उद्देश्य

भाषा का उपयोग अपने विचारो या भावनाओ को किसी अन्य के साथ साँझा करने का एक जरिया है जिसके इस्तेमाल से अपने विचारो को दूसरे तक पहुंचाने में आसानी होती है।

भाषाओ का उपयोग आज के समय में हर जगह की जाती है

भाषा का उद्देश्य है- संप्रेषण या विचारों का आदान-प्रदान।

भाषा के प्रकार

जैसे की हमने शुरुआत में ही आपको बताया है की भाषा के हजारो प्रकार है जो की अलग अलग जगहों पर बोली जाती है। इन भाषाओ की अपनी अपनी उपजातियां या उपभाषा भी है ।

हम यहाँ पर केवल मुख्या भाषाओ का ही जिक्र करेंगे जो की भारत में इतेमाल किये जा रहे है।

भारत की भाषाओं की सूची:

क्रं. सं.भाषाएँबोलनेवालों का अनुपात % में
(1)संस्कृत0.01
(2)मराठी7.5
(3)नेपाली0.3
(4)पंजाबी2.8
(5)संथाली0.6
(6)मलयालम3.6
(7)मणिपुरी0.2
(8)असमिया1.6
(9)ओड़िया3.4
(10)गुजराती4.9
(11)कश्मीरी0.5
(12)कन्नड़3.9
(13)डोगरी0.2
(14)कोंकणी0.2
(15)तमिल6.3
(16)बांग्ला8.3
(17)सिंधी0.3
(18)उर्दू5.2
(19)बोडो0.1
(20)तेलुगू7.9
(21)हिन्दी40.2

बोली किसे कहते है

भाषाओ की उप भाषा को ही बोली कहते है यह अक्सर किसी इलाके या समूह में बोली जाती है भारत में हिंदी भाषा की उपभाषा बृजभाषा, अवध इत्यादि है जिसे बोली भी कहा जाता है।

बोली और भाषा में अन्तर

बोली एक ऐसी भाषा है जो किसी विशेष जनजातीय या छेत्र में उपयोग की जाती है
किन्तु भाषा में इसका विपरीत है यह कई जनजातियों द्वारा बोली जाती है या इसकी कोई सीमा नहीं है

बोली विस्तृत होकर भाषा में तब्दील हो सकती है किन्तु भाषा में यह संभव नहीं है।

कई बोलियां में किसी एक भाषा का समानता मिल सकता है किन्तु कई भाषा में एक भाषा का समानता कभी नहीं मिलता है

भारत में बोली जाने वाली भाषाएँ

भारत में बोली जाने वाली भाषाएँ निम्न है

भाषाक्षेत्र
असमियाअसम राज्य की राजभाषा
बांग्लायह बांग्लादेश और भारत के पश्चिम बंगाल, असम तथा त्रिपुरा राज्यों में बोली जाती है।
गुजरातीगुजरात राज्य की राजभाषा
हिन्दीउत्तरी भारत, मॉरिशस व अन्य देश
कन्नड़कर्नाटक राज्य की राजभाषा
कश्मीरीकश्मीर की भाषा
कोंकणीकोंकणी गोवा, महाराष्ट्र के दक्षिणी भाग, कर्नाटक के उत्तरी भाग, केरल के कुछ क्षेत्रों में बोली जाती है।
मलयालममलयालम भाषा मुख्यतः दक्षिण-पश्चिमी तटीय राज्य केरल में बोली जाती है, यह केरल और केंद्रशासित प्रदेश लक्षद्वीप की राजभाषा है; लेकिन सीमावर्ती कर्नाटक और तमिलनाडु के द्विभाषी समुदाय के लोग भी यह भाषा बोलते हैं।
मणिपुरीमुख्यतः पूर्वोत्तर भारत के लिए मणिपुर राज्य में बोली जाने वाली भाषा है। यह असम, मिज़ोरम, त्रिपुरा, बांग्लादेश और म्यांमार में भी बोली जाती है।
मराठीमहाराष्ट्र की राजभाषा है। इसे बोलने का मानक स्वरूप पुणे (भूतपूर्व पूना) शहर की बोली है। यह भाषा गोवा, कर्नाटक, गुजरात में बोली जाती है। केन्द्रशासित प्रदेशों में यह दमन और दीव , और दादरा तथा नगर हवेली में भी बोली जाती है।
नेपालीयह भाषा नेपाल के अतिरिक्त भारत के सिक्किम, पश्चिम बंगाल, उत्तर-पूर्वी राज्यों आसाम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय तथा उत्तराखण्ड के अनेक लोगों की मातृभाषा है।
उड़ियाउड़ीसा राज्य की राजभाषा
पंजाबीपंजाबी भाषा भारत तथा पाकिस्तान में बोली जाती है।
संस्कृत 
सिंधीभारत, पाकिस्तान
तमिलतमिलनाडु की राजभाषा
उर्दू2,86,00,428
तेलुगुआन्ध्र प्रदेश की सरकारी भाषा
बोडोबोडो भाषा को भारत के उत्तरपूर्व, नेपाल और बांग्लादेश में रहने वाले बोडो लोग बोलते हैं।
डोगरीजम्मू-कश्मीर राज्य की दूसरी मुख्य भाषा
मैथिलीमैथिली भाषा उत्तरी बिहार और नेपाल के तराई के ईलाक़ों में बोली जाने वाली भाषा है।
संथालीझारखण्ड, असम, बिहार, उड़ीसा, त्रिपुरा, और पश्चिम बंगाल

लिपि क्या है

लिपि वह चिन्ह है जिसके जरिये किसी भाषा को लिखित रूप में दर्शाया जाता है। सभी अलग अलग भाषाओ की अलग अलग लिपिया होती है किन्तु यह कई भाषाओ पर लागु नहीं होता है

भारतीय भाषाओं की लिपियाँ बायीं ओर से दायीं ओर लिखी जाती हैं। जबकि केवल उर्दू जो फारसी लिपि को दायीं ओर से बायीं ओर लिखी जाती है।

भाषालिपि
असमियाअसमिया लिपि मूलत: ब्राह्मी लिपि का ही एक विकसित रूप है।
बांग्लाबांग्ला (“বাংলা”) लिपि मूलत: ब्राह्मी लिपि और असमिया लिपि का विकसित रूप है।
गुजरातीगुजराती (“ગુજરાતી”) नागरी लिपि का नया प्रवाही स्वरूप नवीन गुजराती को इंगित करता है।
हिन्दीब्राह्मी लिपि, देवनागरी लिपि, नागरी और फ़ारसी लिपि,
कन्नड़कन्नड़ (“ಕನ್ನಡ”) कन्नड़ लिपि का विकास अशोककी ब्राह्मी लिपि के दक्षिणी प्रकारों से हुआ है।
कश्मीरीऐतिहासिक रूप से कश्मीरी भाषा को चार लिपियों में लिखा जाता है, शारदा, देवनागरी, फ़ारसी-अरबी और रोमन।
कोंकणीकोंकणी अनेक लिपियों में लिखी जाती रही है; जैसे – देवनागरी, कन्न्ड, मलयालम और रोमन।
मलयालममलयालम (“മലയാളം”) में शलाका लिपि
मणिपुरीइस भाषा की अपनी लिपि है, जिसे स्थानीय लोग मेइतेई माएक कहते हैं।
मराठी“मराठी” भाषा को लिखने के लिए देवनागरी और इसके प्रवाही स्वरूप मोदी, दोनों लिपियों का उपयोग होता है।
नेपाली“नेपाली”
उड़ियाउड़िया (“ଓରିୟା”)
पंजाबीपंजाबी (“ਪੰਜਾਬੀ”)
संस्कृत“संस्कृत”
सिंधीसिंधी भाषा मुख्यत: दो लिपियों में लिखी जाती है, अरबी-सिंधी लिपि
तमिलतमिल (“தமிழ்”) ऐतिहासिक रूप से तमिल लेखन प्रणाली का विकास ब्राह्मी लिपि से वट्टे-लुटटु (मुड़े हुए अक्षर) और कोले-लुट्टु (लम्बाकार अक्षर) के स्थानीय रूपांतरणों के साथ हुआ।
उर्दूउर्दू (“اردو”) के लिए फ़ारसी-अरबी लिपि प्रयुक्त होती
तेलुगुतेलुगु (“తెలుగు”)

भाषा और लिपि

भाषा को लिखित रूप में व्यक्त करने के लिए लिपि का इस्तेमाल किया जाता है किसी भी भाषा की लिपि होती है

नीचे की तालिका में विश्व की कुछ भाषाओं और उनकी लिपियों के नाम दिए जा रहे हैं-

क्रमभाषालिपियाँ
1हिंदी, संस्कृत, मराठी, नेपाली, बोडोदेवनागरी
2अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, स्पेनिश, इटेलियन, पोलिश, मीजोरोमन
3पंजाबीगुरुमुखी
4उर्दू, अरबी, फारसीफारसी
5रूसी, बुल्गेरियन, चेक, रोमानियनरूसी
6बँगलाबँगला
7उड़ियाउड़िया
8असमियाअसमिया
देवनागरी लिपि और विशेषताएं

भारत में अधिकतर भाषा को लिखने में इस्तेमाल की जाने वाली लिपि देवनागरी लिपि है इस लिपि में हिंदी, मराठी, नेपाली, बोडो तथा संस्कृत इत्यादि भाषाओ को लिखा जाता है

देवनागरी लिपि का विकास ब्राह्मी लिपि से हुआ है। देवनागरी लिपि में बायीं ओर से दायीं ओर लिखा जाता है। यह एक वैज्ञानिक लिपि है।

यह एक मात्र ऐसी लिपि है जिसमें स्वर तथा व्यंजन ध्वनियों को मिलाकर लिखे जाने की व्यवस्था है।

हिन्दी में लिपि चिह्न

देवनागरी के वर्णो में ग्यारह स्वर और इकतालीस व्यंजन हैं। व्यंजन के साथ स्वर का संयोग होने पर स्वर का जो रूप होता है, उसे मात्रा कहते हैं; जैसे-

अ आ इ ई उ ऊ ऋ ए ऐ ओ औ
ा ि ी ु ू ृ े ै ो ौ
क का कि की कु कू के कै को कौ

मातृ भाषा किसे कहते है (Matra Bhasha kise kahate hain)

जिस प्रकार की भाषा के बीच किसी व्यक्ति का जन्म होता है वह भाषा उसकी मातृभाषा कहलाती है

जैसे ;- पंजाबी भाषा का इस्तेमाल करने वालो के इलाके में जन्मे बच्चे की मातृभाषा पंजाबी होगी।

पहली भाषा, मूल भाषा, मूल भाषा, या माता / पिता / माता-पिता की भाषा, एक ऐसी भाषा है जिसे किसी व्यक्ति ने जन्म से या महत्वपूर्ण अवधि के भीतर उजागर किया है।

कुछ देशों में, मूल भाषा या मातृभाषा शब्द का अर्थ किसी की पहली भाषा के बजाय किसी जातीय समूह की भाषा से है।

एक बच्चे की पहली भाषा उस बच्चे की व्यक्तिगत, सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है। पहली भाषा का एक और प्रभाव यह है कि यह अभिनय और बोलने के सफल सामाजिक पैटर्न के प्रतिबिंब और सीखने के बारे में लाता है।

यह मूल रूप से अभिनय की भाषाई क्षमता को अलग करने के लिए जिम्मेदार है। जबकि कुछ का तर्क है कि “मूल वक्ता” या “मातृभाषा” जैसी कोई चीज नहीं है,

यह महत्वपूर्ण है कि किस संदर्भ में?] महत्वपूर्ण शब्दों को समझने के साथ-साथ यह समझने के लिए कि “गैर” होने का क्या मतलब है? -native “वक्ता, और निहितार्थ जो किसी के जीवन पर हो सकते हैं।

शोध से पता चलता है कि जबकि एक गैर-देशी वक्ता विसर्जन के लगभग दो साल बाद लक्षित भाषा में प्रवाह विकसित कर सकता है,

उस बच्चे को पांच से सात साल के बीच का समय उसी काम के स्तर पर लग सकता है, जब उनके मूल बोलने वाले समकक्षों को [उद्धरण वांछित] ।

प्रादेशिक भाषा किसे कहते है (Pradeshik Bhasha kise kahate hain)

जब कोई भाषा को किसी प्रदेश द्वारा ग्रहण कर उस प्रदेश के सभी कार्य उसी भाषा में किये जाते है तो वह भाषा उस प्रदेश की प्रादेशिक भाषा कहलाती है

जैसे – उत्तेर प्रदेश की प्रदेशिक भाषा हिंदी और उर्दू है

एक क्षेत्रीय भाषा एक संप्रभु राज्य के एक क्षेत्र में बोली जाने वाली भाषा है, चाहे वह एक छोटा क्षेत्र हो, एक संघ राज्य हो या प्रांत या कोई व्यापक क्षेत्र।

पारंपरिक रूप से उस राज्य के नागरिकों द्वारा एक राज्य के दिए गए क्षेत्र के भीतर उपयोग किया जाता है जो राज्य की बाकी आबादी की तुलना में संख्यात्मक रूप से एक समूह बनाते हैं और।

ऐसे कई मामले हैं जब एक क्षेत्रीय भाषा कुछ भाषाओं की तुलना में बोलने वालों की अधिक संख्या का दावा कर सकती है

जो कि संप्रभु राज्यों की आधिकारिक भाषा होती है। उदाहरण के लिए, कैटलन में फिनिश या डेनिश भाषा के अधिक वक्ता हैं।

और 90 मिलियन से अधिक बोलने वालों द्वारा शंघाई के सामान्य क्षेत्र, फ्रेंच की तुलना में अधिक वक्ताओं द्वारा मूल रूप से बोली जाती है;

यू चीनी, 60 लाख से अधिक स्थानीय और विदेशी वक्ताओं के साथ चीन के गुआंगडोंग, हांगकांग और आस-पास के क्षेत्रों में बोली जाने वाली एक चीनी क्षेत्रीय विविधता, बोलने वालों की संख्या में इतालवी को पछाड़ती है।

बोलियाँ न्यूनतम बोली समूह के 70 मिलियन से अधिक वक्ता हैं, जो मुख्य रूप से फ़ुज़ियान और पास के ताइवान में, लेकिन मलेशिया और सिंगापुर के दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में भी हैं।

अन्तर्राष्ट्रीय भाषा किसे कहते है

एक ऐसी भाषा जो एक या एक से अधिक देशो द्वारा इस्तेमाल की जाती हो जिसके जरिये एक देश के लोग दूसरे देश के लोगो से वार्तालाप कर सके ऐसी भाषा को अंतर्राष्ट्रीय भाषा कहते है

अन्तर्राष्ट्रीय भाषा वर्ष संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2008 में घोषित किया गया। और इसे 17 नवंबर (नवम्बर), 1999 को यूनेस्को ने इसे स्वीकृति दी।।

अन्तर्राष्ट्रीय भाषा ;- जब कोई भाषा दो या दो से अधिक राष्ट्रों द्वारा बोली जाती है तो वह अन्तर्राष्ट्रीय भाषा बन जाती है।

जैसे- अंग्रेजी अन्तर्राष्ट्रीय भाषा है। English भाषा का इस्तेमाल विश्व के लगभग सभी देशो में इस्तेमाल की जाती है जिसके कारण इस भाषा को अंतर्राष्ट्रीय भाषा भी कहते है

समाजशास्त्रियों में, एक विश्व भाषा एक ऐसी भाषा है जो भौगोलिक रूप से व्यापक है और विभिन्न भाषा समुदायों के सदस्यों के लिए संवाद करना संभव बनाती है।

इस शब्द का उपयोग निर्मित अंतरराष्ट्रीय सहायक भाषाओं जैसे कि एस्पेरांतो के संदर्भ में भी किया जा सकता है।

राज भाषा किसे कहते है (Rajy Bhasha kise kahate hain)

वह भाषा जो देश के कार्यालयों व राज-काज में प्रयोग की जाती है, राजभाषा कहलाती है।

जैसे- भारत की राजभाषा अंग्रेजी तथा हिंदी दोनों हैं। और अमेरिका की राजभाषा अंग्रेजी है।

इसी तरह अन्य और सभी देशो के अपनी अपनी मान्यता प्राप्त राज भाषाएँ है जिसका इस्तेमाल उस देश के कानूनी प्रक्रियाओं या अन्य किसी भी सरकारी कार्यो में इस्तेमाल किया जाता है

नीचे हमने कई देशो के राजभाषाओ के बारे में बताने की कोशिश की है

देशसरकारी या मूल भाषा
अफ़गानिस्तानदारी-फ़ारसी, पश्तु
अल्बानियाअल्बेनियन
अल्जीरियाअरेबी
अमेरिकन समोआसामोन
अंडोराकैटलन
अंगोलापोर्चुगीज़
एंग्विलाअंग्रेजी
एंटीगुआ और बारबुडाअंग्रेजी
अर्जेंटीनास्पैनिश
अरूबाडच
ऑस्ट्रेलियाअंग्रेजी/अबोरजिनल मूल भाषाएं
ऑस्ट्रियाजर्मन
अज़रबैजानअज़ेरी
आर्मेनियाअर्मेनियाई
Bhasha kise kahate hain in Hindi with example
Bhasha kise kahate hain in Hindi with example

मानक भाष किसे कहते है

वह भाषा-विद्वानों व शिक्षाविदों द्वारा भाषा में एकरूपता लाने के लिए भाषा के जिस रूप को मान्यता दी जाती है, वह मानक भाषा कहलाती है।

मानक भाषा के कुछ उदाहरण इस प्रकार से है

गयी – गई (मानक रूप)
ठण्ड – ठंड (मानक रूप)
अन्त – अंत (मानक रूप)
रव – ख (मानक रूप)
शुद्ध – शुदध (मानक रूप)

यह सभी मानक भाषा के रूप में जानी जाती है इनके अलावा भी और भी ऐसे कई शब्द है जो की एक मानक भाषा के रूप में जानी जाती है

भाषा के मानक और अमानक की पहचान 

मानक भाषा लिखने के काम आती है और बोलने के भी। लिखित और उच्चरित मानक हिन्दी के जो प्रयोग व्याकरणसम्मत, सर्वमान्य, एकरूप और परिनिष्ठित है उनका संक्षिप्त विवरण निम्नानुसार है। 

  • बहुत से लोग बड़ी ‘ई’ की मात्रा का गलत प्रयोग करते हैं, जैसे शक्ती, तिथी, कान्ती, शान्ती। वास्तव में इनके मानक रूप है- शक्ति, तिथि, कान्ति, शान्ति आदि। 
  • बहुत से लोग ‘ऋ’ को रि बोलते हैं जैसे रिण, रीता। यह अमानक प्रयोग है; किन्तु ‘ऋ’ अब शुद्ध स्वर नहीं रह गया है। उच्चारण में ‘रि’ को ‘ऋ’ का उच्चारण स्वीकार कर लिया गया है किन्तु लिखने में संस्कृत शब्दों में ‘ऋ’ ही मानक प्रयोग है जैसे- ऋण, ऋता आदि। 
  • हिन्दी में अंग्रेजी के कुछ ऐसे शब्द प्रचलित हो गए हैं जिनमें ‘ॉ’ की ध्वनि होती है। जैसे- डॉक्टर, कॉलेज, ऑफिस। हिन्दी में डाक्टर, कालेज, आफिस बोलना या लिखना अमानक प्रयोग माना जाता है। 
  • कुछ शब्द ‘इ’ और ‘ई’ देनों मात्राओं से लिखे जाते हैं जैसे- हरि/हरी, स्वाति/स्वाती। किन्तु व्यक्ति के नाम का मानक रूप वही माना जाता है जो नियम द्वारा मान्य है या वह स्वयं लिखता है जैसे-डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सही है, डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय नहीं, क्योंकि डॉ. हरीसिंह, अपना नाम हरीसिंह लिखते थे। 
  • कुछ लोग कुछ शब्दों में बड़ी ‘ई’ के स्थान पर छोटी ‘इ’ की मात्रा लगाते हैं। जैसे श्रीमति, मैथिलिशरण। ये अमानक प्रयोग है। इनके मानक रूप है- श्रीमती, मैथिलीशरण।
  • हिन्दी में ‘र’ के साथ जब ‘उ’ अथवा ‘ऊ’ की मात्रा लगायी जाती है तब उसका रूप होता है ‘रुपया’ अथवा ‘रूप’।

मानक भाषा और जन भाषा में अंतर

मानक भाषाजन भाषा
मानक ‘स्थायी’ है। ‘स्थाई’ अमानक है,
अंग्रेजी में इसे Standard Language’ कहते हैं।संस्कृत के शब्दों में दो स्वरों को एक साथ लिखना अमानक है
हिन्दी में आजकल अनुनासिक चिह्न चन्द्रबिन्दु(ँ) के स्थान पर अनुस्वार लिखा जाने लगा हैमुद्रण की सुविधा के लिए भी अब हिन्दी में अनुनासिक चिह्न एवं चन्द्रबिन्दु के स्थान पर अनुस्वार लिखा जाने लगा है
  • जिन शब्दों के अन्त में ‘ई’ या ‘ई’ की मात्रा (ी ) होती है उनका जब बहुवचन बनाया जाता है तो वह ह्रस्व ‘इ’ की मात्रा में परिवर्तित हो जाती है, जैसे मिठाई-मिठाइयाँ, दवाई-दवाइयाँ, लड़की-लड़कियाँ आदि। इसी प्रकार यदि शब्द के अन्त में ‘ऊ’ की मात्रा हो तो उनके बहुवचन में ह्रस्व ‘उ’ की मात्रा हो जाती है, जैसे आँसू-आँसुओं, लड्डू-लड्डुओं आदि। 
  • मानक हिन्दी में अब ‘क’ के ‘क़’ का प्रयोग भी होने लगा है। ‘क़’ विदेशी(फ़ारसी, अंग्रेजी) शब्दों में आता है जैसे ‘क़लम’। इसी प्रकार ख़, ग़, ज़, फ़ ध्वनियाँ भी हिन्दी में स्वीकार कर ली गयी हैं। ख़त, गै़रत, ज़नाब, सफ़ा, बोलना पढ़े-लिखे होने की निशानी मानी जाती है। 
  • ‘व’ और ‘ब’ में भेद होता है। ‘व’ के स्थान पर ‘ब’ बोलना उचित नहीं है। इस प्रकार ‘ज्ञ’ और ‘क्ष’ केवल संस्कृत शब्दों में ही प्रयुक्त होता है। 
  • हिन्दी में ‘श’, ‘ष’, ‘स’ तीन अलग-अलग ध्वनियाँ हैं- सड़क, शेष, विष, “ाटकोण आदि मानक शब्द रूप हैं 
  • ‘ष्ट’ और ‘ष्ठ’ का उच्चारण प्राय: भ्रम उत्पन्न करता है। इनके बोलने और लिखने में शुद्धता का ध्यान रखना चाहिए, जैसे ‘इष्ट’, ‘नष्ट’, ‘भ्रष्ट’, ‘स्वादिष्ट’, ‘कनिष्ठ, ज्येष्ठ, घनिष्ठ, प्रतिष्ठा आदि।   

Most Asked Q&A

Question ;- vyakaran kise kahate hain (व्याकरण किसे कहते हैं)

Answer ;- यदि आप व्याकरण के बारे में अधिक जानकारी चाहते है तो आप यहाँ क्लिक करे।

Question ;- punjabi bhasha ki lipi kya hai ?

Answer ;- पंजाबी भाषा की लिपि गुरुमुखी है और यहाँ पर गुरुमुखी का अर्थ (मतलब/यानी/अर्थात/Meaning) है ” गुरुओ के मुखी बानी “

Question ;- Sanskrit bhasha ki lipi kya hai ?

Answer ;- वर्तमान में संस्कृत उत्तर भारत में मुख्य रूप से देवनागरी में लिखी जाती है।

दक्षिण भारत में द्रविड लिपियों में, विशेष रूप से तमिलनाडु और, केरल में संस्कृत लेखन में “ग्रन्थ लिपि” का प्रयोग होता है।

Question ;- उर्दू भाषा की लिपि क्या है ?

Answer ;- उर्दू नस्तालीक़ लिपि में लिखी जाती है, जो फ़ारसी-अरबी लिपि का एक रूप है।

Question ;- गुजराती की लिपि क्या है ?

Answer;- गुजराती लिपि, नागरी लिपि से व्युत्पन्न हुई है। गुजराती भाषा में लिखने के लिए देवनागरी लिपि को परिवर्तित करके गुजराती लिपि बनायी गयी थी।

Question ;- नेपाली भाषा की लिपि क्या है ?

Answer;- नेपाल भाषा बहुत सी लिपियों में लिखी जाती है। इनमें प्रमुख लिपियां हैं – रञ्जना, प्रचलित लिपि, ब्राह्मी, भूजिँगोल, देवनागरी आदि। ये सभी लिपियाँ बाएं से दाएं तरफ लिखी जाती

Question ;- मराठी भाषा की लिपि क्या है ?

Answer;- मराठी भाषा की लिपि देवनागरी लिपि है।

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