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बिज़नेस प्लान क्या होता है ? business plan hindi me कैसे लिखते है? बिज़नेस प्लान को लिखते वक्त किन किन बातो का हमे ध्यान रखना होता है?

बिज़नेस प्लान में हमारे हर क्यों , क्या , कैसे , कब , कहा इत्यादि का जवाब होता है दोस्तों बिज़नेस प्लान ही वह डॉक्यूमेंट होता है

जो आपके बिज़नेस को शुरू करने से पहले ही उसके सफलता और असफलता को सबके सामने लेकर पेस कर देता है

इसलिए हमे अपने किसी भी बिज़नेस को शुरू करने से पूर्व अपने बिज़नेस का एक प्लान तैयार कर लेना चाहिए

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Table of Contents

बिज़नेस प्लान क्या है (What is Business plan Hindi me)

यदि कोई बिज़नेस आइडियाज हमारे दिमाग में हो और हम उसे इम्प्लीमेंट करना चाहे तो हमे उस बिज़नेस के लिए प्लान करना पड़ता है जिसमे हम अपने प्रोडक्ट की तैयारी से लेकर अपने सभी कम्पटीटर और गोल्स को प्लान करते है

किसी भी बिज़नेस को शुरू करने से पहले की जाने वाली सभी  प्रकार की तैयारियां बिज़नेस प्लान कहलाती है

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आइये हम इसे एक उदाहरण के जरिये समझते है

मान लीजिये आपको एक घर बनाना है तो आप शुरुआत कैसे करेंगे ? इसमें स्वाभाविक सी बात है आप सबसे पहले अपने लक्ष्य को कन्फर्म करोगे की आपको क्या बनाना है

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छोटा घर, बंगला, या कोई  बड़ा विला बनाना चाहते है फिर उसके बाद आप यह तय करेंगे की वह दिखने में कैसा हो उसमे कितने कमरे होने चाहिए कमरे साइज कितना बड़ा होना चाहिए घर में बाथरूम कहा होगा , इत्यादि छोटी से छोटी बातो का हम ध्यान रखते है

फिर हम उसका एक ब्लूप्रिंट तैयार करते है जिसके बाद हम फिर से उसमे होने वाली सभी  गलतियों को सुधारते है

जिसके बाद हमे हमे उसमे होने वाले लागत का एक आकड़ा मिलता है जिस रकम को आप अपनी जमा पूँजी में से या फिर बैंक से  लोन लेकर लगाते है

और फिर  आप  सभी कच्चे मटेरियल को लेकर हम घर बनाना शुरू करते है

बिज़नेस प्लान को लिखने से क्या फायदा होगा (Writing Profit Business plan Hindi me)

बिज़नेस प्लान को लिखने से निम्न फायदे होते है

  • आप अपने लक्ष्य को आसानी से समझ जाते है
  • प्रतिद्वंदी की ताकत और कमजोरी का पता चल जाता है
  • बिज़नेस में होने वाली कमियों का पता हमे पहले से ही पता चल जाता है जिसे हम सुधार लेते है
  • हम अपने प्रोडक्ट और उसमे कैसी क्वालिटी दे इस बात का पता चलता है जिससे हम बाजार में अन्य लोगो को पीछे कर देते है
  • हमे अपने बिज़नेस में होने वाले खर्चो और उसके मॅनॅग्मेंट को आसानी से कर लेते है

बिज़नेस प्लान और बिज़नेस आइडियाज में अंतर (difference between business idea and Business plan Hindi me)

दोस्तों बिज़नेस प्लान और बिज़नेस आइडियाज में अंतर होता है

बिज़नेस आइडियाज वह होता जिस बिज़नेस को हम शुरू करने वाले होते है और बिज़नेस प्लान वह होता है जिसमे हम किसी भी बिज़नेस के एक्सक्यूटिशन की तैयारी करते है

बिज़नेस आइडियाज में हम यह तय करते है की हम कौन सा बिज़नेस करेंगे और बिज़नेस प्लान में वह होता है जिसमे हम यह करते है की उस बिज़नेस को कैसे शुरू करे ।

 हम बिज़नेस के सभी गोल्स , उसके शुरू करने की प्रक्रिया को और  कम्पटीटर इत्यादि को लिखते है उसे हम बिज़नेस प्लान कहते है  जबकि बिज़नेस आइडियाज में ऐसा कुछ  भी नहीं करते है

अगर विचार बिज़नेस आइडियाज है तो उस विचार का सुझाव बिज़नेस प्लान होता है

बिज़नेस प्लान को कैसे लिखते है

यदि आपको बिज़नेस प्लान लिखना है तो आपको इन निम्न बातो को जानना बहुत ही जरुरी है बिज़नेस प्लान के निम्न भाग होते है जो की इस प्रकार है

1. एग्जीक्यूटिव समरी (कार्यकारी सारांश) / Executive Summary

Executive Summary  पूरी योजना के मुख्य बिंदुओं का एक सार होता है। इसमें बिजनेस प्लान के सभी पार्ट की मुख्य बात include होती है।

इसमें business opportunity के key features से लेकर फाइनेंसियल फोरेकास्ट्स की प्रमुख बातें बताई जाती हैं।

इसका उद्देश्य होता है कि बिजनेस की बेसिक बातों को अच्छे से बताया जाए। अगर एग्जीक्यूटिव समरी पढने के बाद कोई ये समझ लेता है

कि बिजनेस किस बारे में है और इसके बारे में और अधिक जानना चाहता है तो समझिये एग्जीक्यूटिव समरी ने अपना काम कर दिया है।

Executive Summary बहुत लम्बी नहीं होनी चाहिए- 2 पेज पर्याप्त हैं, साथ ही कोशिश करनी चाहिए कि ये रोचक भी हो ताकि potential investors इसे पढ़ कर आगे और जानना चाहें।

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2. इंट्रोडक्शन और कम्पनी ओवरव्यू / Introduction and Company Overview

Business opportunity का छोटा सा डिस्क्रिप्शन- आप कौन हैं, आप क्या बेचने या ऑफर करने का प्लान कर रहे हैं, क्यों, और किसे।

  • बिजनेस के ओवरव्यू के साथ शुरू करें
  • आपने बिजनेस कब शुरू किया या कब से शुरू करने का प्लान कर रहे हैं
  • अब तक कितना इन्वेस्टमेंट किया जा चुका है
  • कितनी प्रोग्रेस हुई है
  • आपका बिजनेस किस टाइप का है और किस सेक्टर में आता है
  • कोई इतिहास- जैसे कि, यदि आपने ये बिजनेस किसी से buy किया, तो पहले इसका मालिक कौन था और उन्होंने इससे क्या हासिल किया
  • इस समय का लीगल स्ट्रक्चर
  • आपका future vision
  • इसके बाद अपने प्रोडक्ट्स और सर्विसेज को सरल शब्दों में बताइए और समझिए कि
  • इसे क्या अलग बात है
  • ये क्या बेनेफिट्स देता है
  • क्यों कस्टमर्स अन्य competitors की बजाये आपसे इसे खरीदेंगे
  • आप अपने products या services को कैसे डेवेलप करने की योजना बना रहे हैं
  • क्या आपके पास कोई पेटेंट्स, ट्रेड मार्क्स या डिजाईन रजिस्ट्रेशन हैं
  • आपकी इंडस्ट्री के key features और success factors क्या-क्या हैं

अपना बिजनेस समझाने में business jargons का प्रयोग मत करिए, सरल शब्दों में अपनी बात रखिये ताकि एक आम इंसान भी चीजों को अच्छे से समझ सके।

3. बाज़ार और कम्पटीशन / Market and Competitors

इस सेक्शन में आपको अपना बाज़ार, उसमे आपकी पोजीशन और अपने competitors को डिफाइन करना चाहिए। ऐसा करने के लिए आप किसी मार्केट रीसर्च जो आपने की हो का रिफरेन्स दे सकते हैं। इसमें आपको ये दर्शाना होता है कि आपको जिस मार्केट में काम करना है उसकी आपको अच्छी समझ है और आप ज़रूरी ट्रेंड्स और market conditions को समझते हैं।

इसमें आपको ये बताने की कोशिश करनी होती है कि प्रतिस्पर्धा के बावजूद आप customers को attract कर पायेंगे और अपना बिजनेस रन कर पायेंगे।

इन चीजों को इस सेक्शन में रखा जा सकता है:

  • आपका मार्केट- उसकी साइज़, उसके विकास का इतिहास, और key current issues
  • आपका टार्गेट कस्टमर बेस- वे कौन हैं और आप कैसे कह सकते हैं कि वे आपके products और services में interested होंगे
  • आपके competitors- वे कौन हैं, वे कैसे काम करते हैं और उनका market share कितना है
  • भविष्य- आगे चल कर इस बिजनेस में क्या बदलाव आ सकते हैं और आप उसपर कैसे react करेंगे
  • अपनी तुलना में अपने competitor की strength और weakness जानना ज़रूरी है- और अच्छा होगा कि आप अपने main competitors की competitor analysis कर लें।

याद रखिये मार्केट हमेशा बदलता रहता है- आपके कस्टमर्स की ज़रूरतें बदल सकती हैं और आपके competitor भी बदल सकते हैं। इसलिए आपको इन बातों को भी माइंड में रख कर आगे बढ़ना होगा।

4. सेल्स और मार्केटिंग स्ट्रेटेजी / Sales and Marketing Strategy

आप ऐसा क्यों सोचते हैं कि आप जो बेचना चाहते हैं या जो सर्विस देना चाहते हैं वो लोग क्यों लेंगे और आप उसे किस तरह कस्टमर तक पहुंचाना चाहते हैं।

डिस्क्राइब करिए कि आप अपनी products और services को प्रमोट और सेल करने के लिए क्या-क्या activities करेंगे। अकसर ये किसी बिजनेस प्लान की कमजोर कड़ी होती है इसलिए इस पर समय देना चाहिए और एक realistic और achievable approach अपनाना चाहिए।

आपके प्लान को इन प्रश्नों का उत्तर देना चाहिए:

आप किसी तरह अपने प्रोडक्ट या सर्विस को मार्किट में पोजीशन करने का प्लान कर रहे हैं?

आपके कस्टमर्स कौन हैं? उन कस्टमर्स की डिटेल दीजिये जिन्होंने आपके प्रोडक्ट या सर्विस में रूचि दिखाई है। और बताइए कि आप नए कस्टमर्स को कैसे attract करने का प्लान कर रहे हैं।

आपकी pricing policy क्या है? अलग-अलग सेग्मेंट्स के कस्टमर्स से आप किस तरह चार्ज लेंगे?

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आप अपने प्रोडक्ट या सर्विस को कैसे प्रमोट करेंगे? अपने सेल्स प्रोसेस मेथड को identify करिए, for e.g: डायरेक्ट मार्केटिंग, advertising, social media, etc

आप अपने कस्टमर्स तक कैसे पहुंचेंगे? आप किन चैनल्स का इस्तेमाल करेंगे? आपके distribution channel में किन partners की ज़रूरत पड़ेगी?

5. ऑपरेशंस / Operations

आपके बिजनेस प्लान में आपकी premises, production facilities, management information system और Information Technology के बारे में जानकारी होनी चाहिए।

आपको इन चीजों पर फोकस करना चाहिए:

  • लोकेशन
  • क्या आपकी कोई बिजनेस प्रॉपर्टी है?
  • क्या आप इस प्रॉपर्टी के मालिक हैं या ये रेंटेड है?
  • आपकी मौजूदा लोकेशन के क्या फायदे और नुक्सान हैं?
  • प्रोडक्ट्स और सर्विसेज का उत्पादन
  • क्या आपको अपनी प्रोडक्शन फैसिलिटीज की ज़रूरत है या इसे outsource करना सस्ता पड़ेगा?
  • अगर आपकी अपनी production facility है तो वो कितनी मॉडर्न हैं?
  • एक्सपेक्टेड डिमांड की तुलना में आपके फैसिलिटी की कैपेसिटी कितनी है?
  • क्या किसी इन्वेस्टमेंट की ज़रूरत पड़ेगी?
  • आपके सप्लायर्स कौन होंगे?
  • मैनेजमेंट इनफार्मेशन सिस्टम्स (प्रबंधन सूचना प्रणाली)
  • क्या आपके पास स्टॉक कण्ट्रोल, मैनेजमेंट एकाउंट्स और क्वालिटी कण्ट्रोल के लिए robust procedures हैं?
  • क्या भविष्य में एक्सपैंड करने पर ये सिस्टम अपग्रेड हो सकते हैं?
  • सूचना प्रौद्योगिकी Information technology

अब लगभग हर बिजनेस में IT का रोल महत्त्वपूर्ण हो गया है, इसलिए इस एरिया में अपने strength और weaknesses को include करिए।अपने सिस्टम की विश्वसनीयता और नियोजित विकास को आउटलाइन करिए।

6. फाइनेंसियल इनफार्मेशन ( वित्तीय जानकारी) / Financial Information

इससे पहले के सेक्शन्स में आपने अब तक जो कुछ भी कहा है उसे नंबर्स में प्रेजेंट करना होता है।

आपको इन चीजों को ध्यान से देखना होगा:

  • आगर आप एक्सटर्नल फंडिंग का सोच रहे हैं तो आपको कितना कैपिटल चाहिए होगा
  • आप देनदारों को as a security क्या दे सकते हैं
  • आप अपना लोन कैसे चुकाने का प्लान कर रहे हैं
  • आपके रेवेन्यु और इनकम के स्रोत क्या-क्या हैं या होंगे
  • फाइनेंसियल प्लानिंग (वित्तीय योजना )

आपका forecast अगले 3 या 5 साल तक का होना चाहिए। पहले 12 महीनो का फोरकास्ट पूरी डिटेल के साथ होना चाहिए।

आप अपनी प्रोजेक्शन्स के पीछे के ऐज्म्पश्न्स को ज़रुर बताएं ताकि बिजनेस प्लान पढने वाले को ये समझ आ सके कि आप इन नंबर्स तक कैसे पहुंचे।

आपके फोरकास्ट में क्या-क्या होना चाहिए?

कैश फ्लो स्टेटमेंट्स

आपका cash balance और अगले 12 से 18 महीनो के लिए cashflow pattern कैसा होगा, ये बताना चाहिए। इसका लक्ष्य है ये ensure करना कि आपके बिजनेस को जारी रखने के लिए आपके पास पर्याप्त वर्किंग कैपिटल होगा। इसके लिए आपको अपनी सेल्स और एम्प्लाइज की सैलरी, और बाकी खर्चों को ध्यान में रखना होगा।

प्रॉफिट एंड लॉस फोरकास्ट (Business plan Hindi me)

अपनी प्रोजेक्टेड सेल्स, और खर्चों को ध्यान में रखकर आप कितना प्रॉफिट / लॉस एक्स्पेक्ट कर रहे हैं। अक्सर नए बिजनेस शुरू में लॉस में चलते हैं और बाद में प्रॉफिट में आ पाते हैं।

अपने फोरकास्ट में कई बार लोग over optimistic हो जाते हैं बड़े-बड़े नम्बर्स दे देते हैं। बेहतर होगा कि आप जितना उम्मीद कर रहे हैं उससे कम ही सेल्स शो करें।

रिस्क एनालिसिस ( जोखिम विश्लेषण)

फाइनेंसियल फोरकास्ट के साथ-साथ ये एक अच्छी प्रैक्टिस है कि आप ये दिखाएं कि आपने अपने बिजनेस में आने वाले संभावित खतरों को भी एनालाइज कर लिया है। और साथ ही आप इनसे निपटने के लिए insurance या अन्य तरीकों को consider कर रहे हैं।

रिस्क एनालिसिस में इन फैक्टर्स का ध्यान रखना होगा:

  • कॉम्पटीटर द्वारा कोई एक्शन
  • कॉमर्शियल इश्यूज – सेल्स, prices, deliveries
  • ऑपरेशनस- IT, technology और प्रोडक्शन फेलियर
  • स्टाफ- स्ट्राइक, पोचिंग*, high salary demand
  • प्राकृतिक आपदाएं / Act of God- बाढ़, भूकम्प, आग लगना

7. अपेंडिक्स (Business plan Hindi me)

हालांकि ये ज़रूरी नहीं है पर आप चाहें तो बिजनेस प्लान के अंत में आप एक अपेंडिक्स भी ऐड कर सकते हैं। इसमें पूरे प्लान के supporting documents add किये जा सकते हैं।

For example:

  • Charts, graphs, or tables
  • वेंडर्स के साथ आपके कॉन्ट्रैक्ट पेपर्स
  • आपके लिसेंस, पेटेंट्स, ट्रेडमार्क्स, इत्यादि
  • प्रमुख एम्प्लाइज के CVs
  • रेंट अग्रीमेंट, लीज अग्रीमेंट, इत्यादि
  • Key contacts की डिटेल्स

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