Dhatu Roop in Sanskrit Puri Jaankari in Hindi

संस्कृत शब्दों के निर्माण के लिए मूल तत्त्व Dhatu ही है। धातु की संख्या लगभग 2012 है

या इसे दूसरे शब्द में कहें तो संस्कृत का लगभग हर शब्द अन्ततः धातुओं के रूप में तोड़ा जा सकता है।

कृ, भू, स्था, अन्, ज्ञा, युज्, गम्, मन्, जन्, दृश् आदि कुछ प्रमुख धातुएँ हैं।

संस्कृत में धातु रूप

धातु को संस्कृत व्याकरण में क्रियाओं (verbs) के मूल रूप कहते हैं।

संस्कृत में धातु-पदों के तीन वर्ग हैं-

  • परस्मैपदी
  • आत्मनेपदी
  • उभयपदी

परस्मैपद पद की सभी लकारों की धातु रुप सरंचना

1. लट् लकार

पुरुषएकवचनद्विवचनवहुवचन
प्रथम पुरुषतितस् (तः)अन्ति
मध्यम पुरुषसिथस् (थः)
उत्तम पुरुषमिवस् (वः)मस् (मः)

लट् लकार को हिंदी में वर्तमान काल और English में Present Tense कहते है क्रिया के आरम्भ से लेकर समाप्ति तक के काल को वर्तमान काल कहते हैं।

जब हम कहते हैं कि ‘रामचरण पुस्तक पढ़ता है या पढ़ रहा है’ तो पढ़ना क्रिया वर्तमान है अर्थात् अभी समाप्त नहीं हुई।

2. लिट् लकार 

पुरुषएकवचनद्विवचनवहुवचन
प्रथम पुरुषअतुस्उस्
मध्यम पुरुषअथुस्
उत्तम पुरुष

लिट् लकार का प्रयोग परोक्ष भूतकाल के लिए होता है। ऐसा भूतकाल जो वक्ता की आँखों के सामने का न हो। प्रायः बहुत पुरानी घटना को बताने के लिए इसका प्रयोग होता है।

जैसे – रामः दशरथस्य पुत्रः बभूव। = राम दशरथ के पुत्र हुए। यह घटना कहने वाले ने देखी नहीं अपितु परम्परा से सुनी है अतः लिट् लकार का प्रयोग हुआ।

3. लुट् लकार

पुरुषएकवचनद्विवचनवहुवचन
प्रथम पुरुषतातारौतारस्
मध्यम पुरुषतासितास्थस्तास्थ
उत्तम पुरुषतास्मितास्वस्तास्मस्

लुट् लकार अनद्यतन भविष्यत् काल के लिए प्रयुक्त होता है। ऐसा भविष्यत् जो आज न हो। कल, परसों या उसके भी आगे।

आज वाले कार्यों के लिए इसका प्रयोग प्रायः नहीं होता। जैसे – ” वे कल विद्यालय में होंगे” = ते श्वः विद्यालये भवितारः।

4. ऌट् लकार

पुरुषएकवचनद्विवचनवहुवचन
प्रथम पुरुषष्यतिष्यतम् (ष्यतः)ष्यन्ति
मध्यम पुरुषष्यसिष्यथस् (ष्यथः)ष्यथ
उत्तम पुरुषष्यामिष्यावःष्यामः

लृट् लकार का प्रयोग सामान्य भविष्य काल के लिए किया जाता है। जहाँ भविष्य काल की कोई विशेषता न कही जाए वहाँ लृट् लकार ही होता है। कल, परसों आदि विशेषण न लगे हों।

भले ही घटना दो पल बाद की हो अथवा वर्ष भर बाद की, बिना किसी विशेषण वाले भविष्यत् में लृट् का प्रयोग करना है। ‘आज होगा’ – इस प्रकार के वाक्यों में भी लृट् होगा।

5. लोट् लकार

पुरुषएकवचनद्विवचनवहुवचन
प्रथम पुरुषतुताम्अन्तु
मध्यम पुरुषहितम्
उत्तम पुरुषआनिआवआम

लोट् लकार उन सभी अर्थों में होता है जिनमें लिङ् लकार (दोनों भेद) का प्रयोग होता है। एक प्रकार से आप कह सकते हैं कि लोट् लकार लिङ् लकार का विकल्प है।

आज्ञा देना, अनुमति लेना, प्रशंसा करना, प्रार्थना करना, निमन्त्रण देना, आशीर्वाद देना- इस सभी अर्थों में लोट् लकार का प्रयोग होता है।

6. लङ् लकार

पुरुषएकवचनद्विवचनवहुवचन
प्रथम पुरुषत्ताम्अन्
मध्यम पुरुषस्तम्
उत्तम पुरुषअम्

लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल के लिए प्रयुक्त किया जाता है। ‘अनद्यतन भूतकाल’ अर्थात् ऐसा भूतकाल जो आज से पहले का हो।

जैसे –

  • वह कल हुआ था = सः ह्यः अभवत्।
  • वे दोनों परसों हुए थे = तौ परह्यः अभवताम्।
  • वे सब गतवर्ष हुए थे = ते गतवर्षे अभवन्।

जहाँ आज के भूतकाल की बात कही जाए वहाँ लङ् लकार का प्रयोग नहीं करना।

7. विधिलिङ् लकार

पुरुषएकवचनद्विवचनवहुवचन
प्रथम पुरुषयात्याताम्युस्
मध्यम पुरुषयास्यातम्यात्
उत्तम पुरुषयाम्यावयाम

जिसके द्वारा किसी बात का विधान किया जाता है उसे विधि कहते हैं। जैसे – ‘स्वर्गकामः यजेत्’ स्वर्ग की कामना वाला यज्ञ करे। यहाँ यज्ञ करने का विधान किया गया है

8. आशीर्लिङ् लकार

पुरुषएकवचनद्विवचनवहुवचन
प्रथम पुरुषयात्यास्ताम्यासुस
मध्यम पुरुषयास्यास्तम्यास्त
उत्तम पुरुषयासम्यास्वयास्म

इस लकार का प्रयोग केवल आशीर्वाद अर्थ में ही होता है।

9. लुङ् लकार

पुरुषएकवचनद्विवचनवहुवचन
प्रथम पुरुषद्ताम्अन्
मध्यम पुरुषस्तम्
उत्तम पुरुषअम्

‘सामान्य भूतकाल’ का अर्थ है कि जब भूतकाल के साथ ‘कल’ ‘परसों’ आदि विशेषण न लगे हों। बोलने वाला व्यक्ति चाहे अपना अनुभव बता रहा हो अथवा किसी अन्य व्यक्ति का, अभी बीते हुए का वर्णन हो या पहले बीते हुए का, सभी जगह लुङ् लकार का ही प्रयोग करना है।

‘आज गया’ , ‘आज पढ़ा’ , ‘आज हुआ’ आदि अद्यतन (आज वाले) भूतकाल के लिए भी लुङ् लकार का ही प्रयोग करना है, लङ् या लिट् का नहीं।

10. ऌङ् लकार

पुरुषएकवचनद्विवचनवहुवचन
प्रथम पुरुषस्यत्स्यताम्स्यन्
मध्यम पुरुषस्यस्स्यतम्स्यत्
उत्तम पुरुषस्यमस्यावस्याम

कारण और फल के विवेचन के सम्बन्ध में जब किसी क्रिया की असिद्धि हो गई हो अर्थात् क्रिया न हो सकी हो तो ऐसे भूतकाल में लृङ् लकार का प्रयोग होता है।

“यदि ऐसा होता तो वैसा होता” -इस प्रकार के भविष्यत् के अर्थ में भी इस लकार का प्रयोग होता है।

आत्मेनपद पद की सभी लकारों की धातु रूप सरंचना

1. लट् लकार

पुरुषएकवचनद्विवचनवहुवचन
प्रथम पुरुषतेआतेअन्ते
मध्यम पुरुषसेआथेध्वे
उत्तम पुरुषवहेमहे

2. लोट् लकार

पुरुषएकवचनद्विवचनवहुवचन
प्रथम पुरुषताम्आताम्अन्ताम्
मध्यम पुरुषस्वआथाम्ध्वम्
उत्तम पुरुषआवहैआमहै

3. लङ्ग् लकार

पुरुषएकवचनद्विवचनवहुवचन
प्रथम पुरुषताम्अन्त
मध्यम पुरुषथास्आथाम्ध्वम्
उत्तम पुरुषवहिमहि

4. विधिलिङ्ग् लकार

पुरुषएकवचनद्विवचनवहुवचन
प्रथम पुरुषईतईयाताम्ईरन्
मध्यम पुरुषईथास्ईयाथाम्ईध्वम्
उत्तम पुरुषईयईवहिईमहि

5. लुट् लकार

पुरुषएकवचनद्विवचनवहुवचन
प्रथम पुरुषतातारौतारस
मध्यम पुरुषतासेतासाथेताध्वे
उत्तम पुरुषताहेतास्वहेतास्महे

6. लृट् लकार

पुरुषएकवचनद्विवचनवहुवचन
प्रथम पुरुषस्यतेस्येतेस्यन्ते
मध्यम पुरुषस्यसेस्येथेस्यध्वे
उत्तम पुरुषस्येस्यावहेस्यामहे

7. लृङ्ग् लकार

पुरुषएकवचनद्विवचनवहुवचन
प्रथम पुरुषस्यतस्येताम्स्यन्त
मध्यम पुरुषस्यथास्स्येथाम्स्यध्वम्
उत्तम पुरुषस्येस्यावहिस्यामहि

8. आशीर्लिन्ग लकार

पुरुषएकवचनद्विवचनवहुवचन
प्रथम पुरुषसीष्टसियास्ताम्सीरन्
मध्यम पुरुषसीष्टास्सीयस्थाम्सीध्वम्
उत्तम पुरुषसीयसीवहिसीमहि

9. लिट् लकार

पुरुषएकवचनद्विवचनवहुवचन
प्रथम पुरुषआतेइरे
मध्यम पुरुषसेआथेध्वे
उत्तम पुरुषवहेमहे

10. लुङ्ग् लकार

पुरुषएकवचनद्विवचनवहुवचन
प्रथम पुरुषआताम्अन्त
मध्यम पुरुषथास्आथम्ध्वम्
उत्तम पुरुषवहिमहि

धातुओं का वर्गीकरण (भेद)

संस्कृत की सभी धातुओं को 10 भागों में बांटा गया है। प्रत्येक भाग का नाम “गण  है।

  1. भ्वादिगण
  2. अदादिगण
  3. ह्वादिगण
  4. दिवादिगण
  5. स्वादिगण
  6. तुदादिगण
  7. तनादिगण
  8. रूधादिगण
  9. क्रयादिगण
  10. चुरादिगण

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