Goat farming business plan in Hindi & Project report

दोस्तों क्या आप भी Goat farming business करना चाहते है यदि हा, तो यह पूरा ब्लॉग आपके लिए हम आपको यहा पर a2z जानकारी आपके साथ साझा कर रहे है

जिसमे हम आपको बकरी पालन कैसे करे से लेकर बकरी पालन में होने वाला फायदा जैसे हर टॉपिक को कवर किया है उम्मीद है की आप इसे इंजॉय करेंगे

Goat farming business

आप देश के किसी भी कोने से हो आपको यह पूरा बिज़नेस प्लान बहुत ही उपयोगी साबित होगा आप चाहे marathi language के हो या फिर goat farming in kerala में करना चाहते हो या आप चाहे goat farm maharashtra में खोलना चाहते हो

Table of Contents

Goat farming business plan in hindi

दोस्तों आपको सबसे पहले यह तय करना होगा की आप किस तरह की बकरियों का पालन करके अपना बकरी पालन का बिज़नेस करना चाहते है हम आपको यहाँ कुछ निम्न व्यवसायो के बारे में बता रहे है जिनमे से किसी एक बिज़नेस को चुन कर आप च्छी कमाई कर सकते है

  1. दुग्ध व्यवसाय के लिए बकरी पालन (bakri palan)
  2. मांस व्यवसाय के लिए बकरी पालन
  3. बाल और खाल का व्यवसाय करने हेतु बकरी पालन
  4. या फिर इन सभी के लिए बकरी पालन

आप इनमे से किसी भी प्रकार के बकरी पालन का चुनाव कर सकते है आप जिस तरह के व्यवसाय को करना चाहते है

ठीक उसी तरह के बकरियों का पालन भी करना होगा जैसे की दुग्ध व्यवसाय हेतु आपको अत्यधिक दूध देने वाली बकरियों को पालना चाहिए

Goat farming business plan download

Goat farming business plan for beginners Download

दोस्तों आज हम इन सभी प्रकार के व्यवसाय की बकरी पालन के बारे में चर्चा करेंगे

बकरी की नस्ल या प्रकार (Indian Goat breeds/Types)

दोस्तों बकरी पालन बिज़नेस (Goat farming business) में आपका सबसे पहला कदम है की आप किस नस्ल की बकरी का चुनाव करते है

यदि आप अच्छी नस्ल की बकरी का चुनवा करेंगे तो आप अच्छा मुनाफा (profitable goat farming) कमाएंगे और अगर आप अच्छे नसल की बकरी का चुनाव नहीं करते है तो आपको बिज़नेस में कम फायदा या नुक्सान भी हो सकता है

वैसे हमारे भारत में मुख्य रूप से 20 नस्लों की बकरिया पायी जाती है किन्तु इन सभी नसलो की उप नस्ले सैकड़ो की संख्या में है तो हम आपको यहाँ (Goat farm information in Hindi) पर कुछ ऐसे नस्लों के नस्लों के बारे में बता रहे है जो की बहुत ही ज्यादा प्रसिद्ध है

1. सिरोही(sirohi)

इस प्रजाति की बकरिया गुजरात और राजस्थान में पायी जाती है इनका उपयोग दूध और मांस के लिए किया जाता है इस नसल की बकरिया दूध कम देती है

इनका बाल बहुत बड़ा होता है जोकि हर साल 3 Cm तक बढ़ता है ये बकरिया साल में दो बार प्रजनन करती है जन्म के समय बच्चे का वजन 3 kg तक होता है

ज्यादातर बकरिया एक बार में दो बच्चो को जन्म देती है किन्तु ऐसी बकरिया केवल 70% तक ही पायी जाती है बाकी की 30% बकरिया सिंगल बच्चे को जन्म देती है

2. जमुनापारी (jamunapari)

जमुनापारी नस्ल की बकरिया उत्तर प्रदेश (UP) में पायी जाती है यह बकरिया भारत की सबसे अच्छी बड़ी बकरियों की नस्ल में से एक है

 इस नस्ल की बकरियों की पहचान उनके छोटे सींग और उनके लम्बे कान जो की 8 से लेकर 9 इंच तक लम्बे होते है

इस तरह की बकरिया साल में केवल एक बार ही प्रजनन कराती है जो की दो बच्चो को जन्म देती है किन्तु यह भी केवल 70 प्रतिशत तक ही बकरिया देती है

इन बकरियों का उपयोग मांस और दूध का व्यवसाय करने हेतु किया जाता है यह बकरिया एक दिन में 3 लीटर तक दूध आसानी से देती है

3. बर्बरी या बाबरी  (Barbari)

यह बकरी को बर्बरी या बाबरी बकरी कहा जाता है यह मुख्य रूप से अफ्रीका में पायी जाने वाली बकरी है और भारत में यह बकरी उत्तर प्रदेश और राजस्थान में पायी जाती है

इन बकरी की कीमत (barbari goat price) कम होती है जो की सामान्यता  5000 रुपये तक होती है

यह बकरी आकर में छोटी होती है इनके कान भी छोटे होते है जो की खड़े रहते है  इनके शरीर के बाल भी छोटे होते है इन बकरियों का पालन दूध और मांश के लिए किया जाता है यह बकरिया रोज 2 किलो दूध देती है

यह साल में दो बार प्रजाना कराती है एक बार में यह  2 से 3 बच्चो को  जन्म देती है

4. बोआरा (boara)

boara नस्ल की बकरिया भारत में बहुत ही कम पायी जाती है यह बकरिया भारत में उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु , राजस्थान में पायी जाती है किन्तु इन सभी इलाको में इनकी संख्या बहुत ही कम है यह मुख्या रूप से अफ्रीका में पायी जाने वाली बकरिया है

यह मांस के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है इनका उपयोग भी मांस और दूध के लिए ही करते है यह बकरिया बहुत ही कम समय में 30 से 35 किलोग्राम की हो जाती

यह साल में कई बार प्रजनन कर करती है और यह बकरिया अन्य बकरियों की तुलना काफी महँगी भी होती है

5. झाकरण (jhakaran)

यह बकरिया ज़्यदातर राजस्थान में मिलती है इन बकरियों में दूध और मांस अन्य बकरियों की तुलना में बहुत ही अधिक मात्रा में पाया जाता है यह बकरिया एक दिन में तीन लीटर दूध देने में सामर्थ्य रखती है

यह बकरिया बहुत ही अधिक तेजी से बढ़ती है और यह साल में 1 बार प्रजनन कराती है यह दो बच्चे एक बार में जन्मती है इन बकरियों का मांस बहुत ही अधिक लोक प्रिय होता है

यह बकरिया महँगी होती है

6. औस्मनावादी

इस तरह की बकरिया भारत में कर्नाटका , महाराष्ट्र ,तेलंगना में पायी जाती है , यह बकरिया महँगी होती है क्युकी इनका मांस बहुत ही पसंद किया जाता है

यह बकरिया साल में तीन बार प्रजनन कराती है और प्रत्येक बार दो बच्चो को जन्म देती है यह बकरिया एक दिन में एक लीटर से भी अधिक मात्रा में दूध देती है

7. सुरति (surti)

सुरति नस्ल की बकरिया गुजरात के सूरत में अधिक पायी जाती है जिसके वजह से इनका नाम सुरति पड़ा यह भारत के कुछ ही राज्यों में पायी  जाती है

यह बकरिया देखने में छोटे कद की होती है इनके बाल चमकीले और छोटे होते है इनके कान भी छोटे और खड़े होते है यह बकरिया घरो में पाली जाती है क्युकी यह बकरिया ज्यादा चलने में सछम नहीं होती है

यह बकरिया अन्य बकरियों की तुलना में अधिक दूध देती है यह एक बार में लगभग दो किलो ग्रामं तक दूध दे देती है यह बकरिया बहुत ही लोकप्रिय होती है

8. बीतल (beetal)

यह बकरिया भारत देश के पंजाब और हरियाणा में पायी जाती है जो की  देखने में जमुनापारी बकरी की तरह होती है किन्तु इनका शरीर का वजन जमुना पारी से कम होता है

यह बकरिया साल में एक बार ही प्रजनन कराती है और औसतन 1 से 2 बच्चो को जन्म देती है यह बकरिया भी 2 KG तक दूध देने में समर्थ होती है

इस नस्ल के बकरे ढाढ़ीदार होते है जबकि बकरिया नहीं

9. सोजत (sojat)

यह बकरिया राजस्थान में पायी जाती है जो की बहुत ही अधिक मात्रा में दूध देती है इनका शरीर भी बहुत ही कम समय में विकसित हो जाता है  यह बकरिया आम तौर पर Goat farming के लिए इस्तेमाल की जाती है

यह देखने में बड़े आकर की और इनका रंग अक्सर सफ़ेद होता है  यह बकरिया सात महीने में एक बार प्रजनन कराती है

10. ब्लैक बंगाल

इस नस्ल की बकरिया भारत में आसाम , पशिचम बंगाल , उड़ीसा में पायी जाती है यह वर्ष में दो बार प्रजनन कराती है और यह साल में चार बच्चे देती है

ब्लैक बंगाल नस्ल की बकरियों का शरीर मोटा और सींघ आगे की और निकला होता है इन बकरियों का मांस मीठ और स्वादिस्ट होता है जिसकी वजह से इनकी मांग और कीमत दोनों ही बहुत अधिक है

bakri palan project report

bakri palan project report की जरुरत आपको तब होती है जब बकरी पालन शुरू करने जा रहे होते है या फिर आप bakri palan  के लिए लोन लेना चाहते है

हम आपको 100 बकरी और 5 बकरे का प्रोजेक्ट रिपोर्ट (goat farming project report ) दे रहे है जो की नीचे लिंक में क्लिक करने पर मिल जायेगा इस प्रोजेक्ट रिपोर्ट को आप बैंक में भी लोन (goat farming project report for bank loan)लेने के लिए इस्तेमाल कर सकते है

For 100 Goat farming project report Download in excel & Pdf

For 50 Goat farming project report Download in excel & Pdf

किन्तु ध्यान रहे आपको लोन लेने के लिए आपका प्रोजेक्ट रिपोर्ट CA के द्वारा ही बनवाना होगा जो की मान्य भी हो गए

Goat farm profit calculator

goat farm profit calculator आपको सभी तरह की लागत जैसे फीड पर होने वाला खर्च, जगह और अन्य खर्चो को जोड़ कर आपको होने वाले प्रॉफिट की गणना करके आपको रिजल्ट दे देता है 

हम आपको यह goat farm profit calculator का लिंक दे रहे है जिसे आप इस्तेमाल कर अपने निवेश और प्रॉफिट की गणना आसानी से कर सकेंगे 

Goat farm shed design pdf

कम लागत वाली आवास सामग्री के साथ सरल शेड का प्रावधान (goat farm shed layout) भेड़ और बकरी के लिए इसकी इष्टतम उत्पादन क्षमता के लिए पर्याप्त है।

मिट्टी के फर्श वाले शेड देश के अधिकांश हिस्सों के लिए उपयुक्त हैं, जहां उच्च वर्षा देखी जाती है।पानी के ठहराव को रोकने के लिए एक ऊंचे क्षेत्र में शेड का निर्माण किया जाना चाहिए।

Goat farm shed design pdf Download

शेड के चारों ओर चारे के पेड़ उगाए जा सकते हैं, जो बढ़ती बकरियों के लिए चारा का स्रोत है।बकरियों के लिए स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होना चाहिए।

शेड का निर्माण उचित वेंटिलेशन के साथ किया जाना चाहिए। शेड के दीवारों को निर्माण करते समय दरार या छेद से मुक्त होना चाहिए।

शेड के फर्श मज़बूत होने चाहिए और उनमें पानी सोखने की क्षमता होनी चाहिए। फर्श का निर्माण इस तरह से किया जाना चाहिए, ताकि इसे आसानी से साफ किया जाए।

शेड के प्रकार रियरिंग की प्रणाली पर निर्भर करते हैं।एक कवर क्षेत्र और रन स्पेस के साथ ओपन टाइप हाउसिंग आमतौर पर पर्याप्त है।

  1. रन स्पेस को चेन लिंक द्वारा कवर किया जाना चाहिए।
  2. ढका हुआ क्षेत्र रात और प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियों में जानवरों के आश्रय के लिए उपयोग किया जाता है।
  3. फर्श को सुखाने के लिए वेंटिलेशन / एयर आंदोलन के लिए उदार प्रावधान के साथ एक आरामदायक घर पूर्व-पश्चिम अभिविन्यास के लिए उपयुक्त होगा।
  4. सस्ती लागत और स्थायित्व के कारण थटेड छत सबसे उपयुक्त है।
  5. हालांकि आवर्ती लागत को कम करने के लिए संगठित खेतों के लिए नालीदार एस्बेस्टस शीट का भी उपयोग किया जा सकता है और अब टिकाऊपन है।
  6. गैबल छत आमतौर पर पसंद की जाती है।
  7. छोटे शेड्स से लेकर टाइपिंग छत तक की सलाह दी जाती है।
  8. जब जानवरों को दिन के समय चराई के लिए ले जाया जाता है और केवल रात के दौरान आश्रय लिया जाता है, तो कवर स्थान पर्याप्त होगा।
  9. जब जानवरों को गहनता से रखा जाता है, तो आवास की कलम और रन प्रणाली उपयुक्त होती है।
  10. आश्रय की लंबाई के लिए कोई प्रतिबंध नहीं है, हालांकि शेड की चौड़ाई 12 मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए और आश्रय की इष्टतम चौड़ाई 8 मीटर है।
  11. ईवे की ऊंचाई 2.5 मीटर और रिज की ऊंचाई 3.5 मीटर होनी चाहिए।
  12. खुली जगह के लिए उपयोग की जाने वाली चेन लिंक की ऊंचाई 4 फीट होनी चाहिए। ओवरहांग की लंबाई 75 सेमी – 1 मीटर होनी चाहिए।
  13. अलग-अलग फीडर और पानी के कुंडों को ध्यान केंद्रित फ़ीड, हरा चारा और पानी के लिए रखा जाना चाहिए।

Floor space requirements

Recommended floor space requirements for Indian conditions

Age groupsCovered space(sq.m)Open space (sq.m)
Up to 3 months0.2-0.250.4-0.5
3 months to 6 months0.5-0.751.0-1.5
6 months to 12 months0.75-1.01.5-2.0
Adult animal1.53.0
Male, Pregnant or lactating ewe/ doe1.5-2.03.0- 4.0

Floor space requirement per animal (BIS standard)

                 Types of animalsMinimum floor space per animal (59.m)
Ram or buck in groups1.8
Ram or buck – individual3.2
Lambs or kids – in group0.4
Weaner in groups0.8
yearling or goatlings0.9
 Ewe or doe in groups1.0
Ewe with lamb1.5
Goat farming business


Feeding and watering space requirement

Type of animalSpace per animal (cm)Width of manger/
water trough(cm)
Depth of manger/
water trough (cm)
Height of inner wall of manger/
water trough
 (cm)
Sheep and goat40 – 50503035
Kid/lamb30 – 35502025

Dimensions of different sheds in a sheep and goat farm

Name of the shedlx w x h (m)No. of animals HousedRemarks
Ewe/ doe shed15 x 4 x 360
Ram/ Buck shed4 x 2.5 x 38Make partition length wise
Lamb/ kid shed7.5 x 4 x 375Make partition width wise
Lambing/ kidding shed1.5 x 1.2 x 31Provide manger and waterer
Isolation / sick animal shed3 x 2 x 31Provide proper ventilation and bedding materials
Shearing shed6 x 2.5 x 31Make arrangement for storage of wool
Shepherd house6 x 4 x 3It should be located nearer to flock
Milch doe shed1.2 x 0.8 x 31

Goat farming training institute

यदि आप बकरी पालन का व्यवसाय (goat farming business)करना चाहते है तो आपको प्रशिछण जरूर लेना चाहिए जहा से आपको बिज़नेस के बारे पूरी जानकारी दी जाती है जैसे की बकरी के चारे में गुणवत्ता कैसे लाये

उनमे होने वाली बीमारी तथा उपचार कैसे करे किस तरह की बकरी का उपयोग किस चीज में लाना चाहिए इत्यादि बातो की जानकारी मिलती है जो की यह अहम् जानकारी भी होती है

हम आपको नीचे भारत के कुछ टॉप इंस्टिट्यूट के बारे में बता रहे है जहा से आप कुछ महीनो का प्रशिछण मिल जाता है

Goat farming investment

हम 100 बकरी और 4 बकरा का जो की सिरोही नस्ल की बकरियो का निवेश की गणना कर रहे है जो की कुछ इस तरह से है

Goat purchasing cost

Weight
of
goat 
210 rs
per kg
Cost
of 1
Goat
 Cost 
weight
of
1 does
is 30 kg
30×21063006300×100
=630000
weight
of
1 buck
is 35 kg
35×21073507350×4
= 29400
Goat
purcha-
sing
cost 
  659400
GoatsGoats x
Area
need
per goat
Area
sqft
Cost
(200
rs per
sqft)
100
Does
(10sqft
per does)
100×101000
sqft
1000×200
=200000
4 bucks
(15sqft
per
buck)
4×1560
sqft
60 x 200
=12000
130 kids
(5sqft
per kid)
130×5650
sqft
650×200
=130000
30 bucks
(15sqft
per
buck)
30 x 15450
sqft
450×200
=90000
Total
space
 2010
sqft
 
Total
cost
of shed 
  432000 Rs
Goat farming business

Equipments

NamesNumbercost
Chaff cutter120000
Feeders,
1000 rs per
feeder
1000 x 55000
water pots,
200 rs per
pots
200 x 51000
Total cost of
equipments  
 26000

Feeding cost of (100+4) goats and kids

DescriptionGoatxRs
xdays
Cost of
feed
104 Adult
goat feed
10 Rs per
day for 14
months
or 425 days
104x10x
425
442000
129 kids
goat feed
6 RS per
day for 4
months or
120 days
(2 months
on milk
feeding)
After 6
months they
are ready
for sale
129x 6x
120
92880
29 kids save
for Eid &
feed them
for
remaining
6 months
180 days
with 10 Rs
per day
feed cost
29x10x
180
52200
Total cost
of Feed
 587080

Monthly Expenses

NamesNumberCost
Vaccine &
medical
charges
20 Rs per
goat.
104 goats
with kids
104+258
=362
362 x 207240
Labors
wages
5000 Rs
per month,
1 labor is
enough for
100 goats.
5000 x 1260000
Water &
Electricity
500 x 126000
Other
expenses
30003000
Monthly
expenses
Total cost
 76240

Sale of Animals

No. of kids
for sale
Kids x goat
weight x
sale weight 
Cost
1st crop   
100 kids of
6 months
with an
average
weight of
20 kg is
ready for
sale in 210
rs per kg
100x20x210420000
29 bucks of
12 months
with average
weight of
50 kg is for
sale on Eid,
is for sale
in 320 Rs
per kg
29x50x320464000
2nd crop  
100 kids of
6 months
with average
weight of 20 kg
is ready for
sale in
210 rs per kg
100x20x210420000
Manure of
goats in
1 year
 8000
Total sale
of Animal
cost
 1312000

Goat farming cost and profit

Total Fixed investment = Goat purchasing cost + Cost of shed + Equipments

Total Fixed Investment  = 649400 + 432000 + 26000

Total Fixed investment = 1107400 Rs

Profit

Total profit =  Total sale of Animal cost – (total cost of feed + total monthly expenses )

Total Profit = 1312000 – ( 587080 + 76240 )

Total Profit = 1312000 – 663320

Total Profit = 648680 Rs

Reproduction

1st crop kidsMortalityremai-
ning
kids
60% of
goats
giving
twins,
60% of
90
goats,
is 54
54×2
=108
10%
mortality
11 kids
dead
108-11
=97
97
40% of
goats
giving
single
kid, 40%
of
90 goats
is
36 kids
36×1
=36
10%
mortality
4 kids
dead
36-4
=32
32
Total
kids    
(in 7

months)
  129
kids
2nd crop    
60% of
goats
giving
twins,
60%
of 90
goats is
54
54 x 2
=108
10 %
mortality
11 kids
dead
108-11
=97
97
40% of
goats
giving
single
kid, 40%
of 90
goats is
36 kids
36 x 1
=36
10%
mortality
4 kids is
dead
36-4
=32
32
Total
kids     
(in 7

months)
  129
kids
Total
kids
in 14
months 
  258

we get 129 kids in one batch (7 months). Or 258 kids in  14 Months.

Goat farming business Government scheme

bakri palan book in hindi

Goat farming book in hindi pdf

Feed for Goat farming business

यदि आप अपने बकरी पालन को फलता फूलता देखना चाहते है तो आपको यह सबसे ज्यादा जरुरी है की आप अपने बकरियों को समय समय पर उन्हें पोषित आहार देते रहे

हम आपको कुछ ऐसे आहार के बारे नीचे बता रहे है जो की उनमे से एक है

1. प्रोटीन

बकरियों के शरीर के विकास में प्रोटीन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है प्रोटीन की भरपाई के लिए आप अपने बकरियों को दलहनी जैसे बरसीम , राजमा , और लोबिया एक निश्चित मात्रा में समयानुसार दे सकते है

2. कार्बोहइड्रेट

कार्बोहाइड्रेट का उपयोग ऊर्जा के लिए किया जाता है आप अपनी बकरियों को गेहू , चावल , मक्का इत्यादि भूसे में मिला कर खिला सकते ै

3. वसा

वसा का भी काम पशुओं को ऊर्जा प्रदान करना ही होता है किन्तु ध्यान रहे इसकी जरा सी भी अधिक मात्रा पशु को नुक्सान भी दे सकती है इसलिए बिना पशु विशेषज्ञ से जानकारी लिए आप इसे न ही दे तो अच्छा रहेगा

3. विटामिन्स और खनिज लवण (Vitamins)

यह जानवर की प्रजनन छमता और शारीरिक छमता को बनाये रखने में बहुत ही अधिक उपयोगी होते है

बकरियों में पाए जाने वाले रोग और उपचार

बकरियों में निम्न लिखित बीमारियां होने के आसार होते है किन्तु यदि आप उनका सही से ख्याल रखते है तो आप इन बीमारियों से अपनी बकरियों को आसानी से बचा लेंगे

बकरियों में पायी जानी वाली बीमारियां कुछ इस तरह से है

  • निमोनिया
  • जहरीले दस्त (enterotoxemia)
  • फुट रौट (खुरो का रोग )
  • संक्रमित गर्भपात (brucellosis)
  • तिल्ली ज्वर
  • गलघोटू
  • रोकथाम
  • जोन्स रोग
  • थनैला रोग

इन सभी बिमारियों से बचने के लिए आपको अपने सभी बकरियों को पशु विशेष्ज्ञ को जरूर दिखाना चाहिए और उनसे समय समय पर टीके जरूर लगवाए

बकरियों को वैज्ञानिक विधि से ही पालन करे(Goat farming business with scientific method only ).

Goat farming business Registration

आप अपने इस नए बिज़नेस को यदि पंजीकरण करनवाने चाहते है तो आपको अपने शहर के नजदीकी DSC यानी जिला उद्योग केंद्र से करवा सकते है

किन्तु यदि आप खुद से करना चाहते है तो आप उद्योग आधार के जरिये भी अपने बिज़नेस को रजिस्टर करवा सकते है

यदि आप अपने इस बिज़नेस का पंजीकरण करवा लेते है तो आपको भारत सरकार के सभी स्कीम में फायदा आसानी से मिल जायेगा जिसके लिए आपको अपने बिज़नेस का पंजीकरण करवाना जरुरी होता है

Goat farming business Scope

निम्नलिखित कारणों से भारत में बकरी पालन की जबरदस्त गुंजाइश और क्षमता है:

  • भारतीय जनसंख्या का 80% से अधिक मांस खाने वाले हैं।
  • लोगों की क्रय शक्ति बढ़ रही है और खपत पैटर्न में एक अलग बदलाव है, नॉन-वेज अब आहार का एक अनिवार्य हिस्सा बन गया है।
  • मटन चिकन या बीफ / पोर्क से अधिक लोगों द्वारा पसंद किया जाता है (एक चयनित अनुभाग द्वारा उत्पादित)
  • मटन की उपलब्धता मांग से कम है।
  • इसमें छोटे निवेश की आवश्यकता होती है और यह डेयरी की तुलना में व्यावसायिक प्रस्ताव के लिए उतना जोखिम भरा नहीं है।
  • उपर्युक्त कारणों से बकरियों / बकरे के मांस की बिक्री कभी भी एक समस्या नहीं है।

निर्यात क्षमता

निर्यात का दायरा भी बहुत बड़ा है, हालांकि विदेशों में बकरे के मांस को बेचने के लिए संबंधित राष्ट्रों की सख्त फाइटोसैनेटिक स्थितियों और मानकों का पालन करना पड़ता है।

निर्यात में रुचि रखने वालों के लिए APEDA की यह कड़ी उपयोगी होगी,

(सावधानिया) Precaution for Goat farming business

किसी भी बिज़नेस को सफल, करने के लिए कुछ बातो का विशेष ध्यान रखना होता है जिसके बाद आपको उस बिज़नेस से अच्छा लाभ मिलता  है

ठीक उसी तरह से आपको इस बिज़नेस में भी कुछ महत्वपूर्ण बिन्दुओ पर ध्यान देना होगा जैसे

  • समय समय पर दवा
  • समय पर भोजन
  • समय पर पानी
  • सही रख रखाव इत्यादि
  • उन्हें किसी भी तरह के घातक जानवरो से दूर रखे

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