Utpreksha Alankar [ उत्प्रेक्षा अलंकार किसे कहते है ]

Utpreksha Alankar भी अलंकार के अर्थालंकार का एक भेद है जिसका हिंदी व्याकरण में अपना एक अलग मत्वा है

उत्प्रेक्षा अलंकार में अप्रस्तुत को प्रस्तुत मान लिया जाता है ऐसे अलंकार में यदि को चीज न हो तो उसे काल्पनिक रूप से मान लिया जाता है

चलिए इसके बारे में और डिटेल्स के साथ समझते है

Utpreksha Alankar|उत्प्रेक्षा अलंकार

उत्प्रेक्षा अलंकार की परिभाषा :

जहाँ पर उपमान के न होने पर उपमेय को ही उपमान मान लिया जाए वहाँ पर उत्प्रेक्षा अलंकार होता है।

इस प्रकार के अलंकार में मनु, जनु, जनहु, जानो, मानहु मानो, निश्चय, ईव, ज्यों आदि शब्द आते हैं।

आईये इसे उदाहरण के जरिये समझते है।

Utpreksha Alankar के उदाहरण ;-

  • नेत्र मानो कमल हैं। ।

इस उदाहरण में ‘नेत्र’ – उपमेय की ‘कमल’ – उपमान होने कि कल्पना कि जा रही है।

मानो शब्द का प्रय्प्ग कल्पना करने के लिए किया गया है। आएव यह उदाहरण उत्प्रेक्षा अलंकार के अंतर्गत आएगा।

  • बहुत काली सिल जरा-से लाल केसर से कि जैसे धुल गई हो।

ऊपर दिए गए उदाहरण में जैसा कि आप देख सकते हैं

बहुत काले पत्थर की ज़रा से लाल केसर से धुलने कि कल्पना कि गयी है।

अतः यह उदाहरण उत्प्रेक्षा अलंकार के अंतर्गत आएगा।

  • मानो माई घनघन अंतर दामिनी। घन दामिनी दामिनी घन अंतर, शोभित हरि-ब्रज भामिनी।। 

इन पंक्तियों में रासलीला का एक अलोकिक द्रश्य दिखाया गया है।

गोरी गोपियाँ और श्यामवर्ण कृष्ण मंडलाकार नाचते हुए ऐसे लगते हैं ‘

मानो बादल और बिजली साथ साथ शोभायमान हों।

  • जान पड़ता है नेत्र देख बड़े बड़े हीरो में गोल नीलम हैं जड़े। 

उदाहरण में देख सकते हैं यहां बड़े-बड़े नेत्र (उपमेय ) में  नीलम (उपमान) के होने की कल्पना की जा रही है।

यहाँ कवि कह रहा है की तुम्हारी बड़ी बड़ी आँखें ऐसी लगती हैं जैसे की हीरों में नीलम जड़े हुए हैं। 

जैसा की आपने देखा उपमेय मं उपमान के होने की कल्पना की जा रही है।

इस वाक्य में जान पड़ता है utpreksha alankar का प्रयोग किया जा रहा है।

Utpreksha alankar ke 20 udaharan

सखि सोहत गोपाल के, उर गुंजन की माल।
बाहर लसत मनो पिये, दावानल की ज्वाल।।

नेत्र मानो कमल हैं।

खंजरीर नहीं लखि परत कुछ दिन साँची बात।
बाल द्रगन सम हीन को करन मनो तप जात।।

ले चला साथ मैं तुझे कनक। ज्यों भिक्षुक लेकर स्वर्ण।

लता भवन ते प्रकट भे, तेहि अवसर दोउ भाय।
मनु निकसे जुग बिमल बिधु, जलद पटल बिलगाय।।

सखि सोहत गोपाल के, उर गुंजन की मालबाहर
सोहत मनु पिये, दावानल की ज्वाल।।

सिर फट गया उसका वहीं। मानो अरुण रंग का घड़ा हो।

कहती हुई यों उत्तरा के नेत्र जल से भर गए।
हिम के कणों से पूर्ण मानो हो गए पंकज नए।

बहुत काली सिल जरा-से लाल केसर से कि जैसे धुल गई हो।

मुख बाल रवि सम लाल होकर, ज्वाला-सा बोधित हुआ।

सोहत ओढ़े पीत पट, स्याम सलोने गात।
मनो नीलमणि सैल पर, आतप पर्यो प्रभात।। 

कहती हुई यों उत्तरा के नेत्र जल से भर
गए हिमकणों से पूर्ण मानो हो गए पंकज नए।

पाहून ज्यों आये हों गाँव में शहर के;
मेघ आये बड़े बन ठन के संवर के।

नील परिधान बीच सुकुमारी खुल रहा था मृदुल अधखुला अंग,
खिला हो ज्यों बिजली का फूल मेघवन बीच गुलाबी रंग।

जान पड़ता है नेत्र देख बड़े
बड़े हीरो में गोल नीलम हैं जड़े।

उत्प्रेक्षा अलंकार के भेद

हिन्दी व्याकरण में उत्प्रेक्षा अलंकार के मुख्य रूप से तीन भेद बतलाये गए है – जो की 1. वस्तुप्रेक्षा अलंकार, 2. हेतुप्रेक्षा अलंकार, 3. फलोत्प्रेक्षा अलंकार।

1. वस्तुप्रेक्षा अलंकार

जहाँ पर प्रस्तुत में अप्रस्तुत की संभावना दिखाई जाए वहाँ पर वस्तुप्रेक्षा अलंकार होता है।

2. हेतुप्रेक्षा अलंकार

अहेतु में हेतु की सम्भावना देखी जाती है। अथार्त वास्तविक कारण को छोडकर अन्य हेतु को मान लिया जाए वहाँ हेतुप्रेक्षा अलंकार होता है।

3. फलोत्प्रेक्षा अलंकार

वास्तविक फल के न होने पर भी उसी को फल मान लिया जाता है वहाँ पर फलोत्प्रेक्षा अलंकार होता है।

उत्प्रेक्षा अलंकार के उदाहरण संस्कृत

उन्मेषं यो मम न सहते जातिवैरी निशाया-
मिन्दोरिन्दीवरदलदशा तस्य सौन्दर्यदर्पः ।
नीतः शान्ति प्रसभमन्या वक्रकान्त्येति हर्षा ।
लग्ना मन्ये ललित तन ते पादयोः पदमलक्ष्मी ।।

Most Asked Q&A

उत्प्रेक्षा अलंकार किसे कहते हैं

जहाँ पर उपमान के न होने पर उपमेय को ही उपमान मान लिया जाए वहाँ पर उत्प्रेक्षा अलंकार होता है।

उत्प्रेक्षा की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए

जहाँ पर उपमान के न होने पर उपमेय को ही उपमान मान लिया जाए वहाँ पर उत्प्रेक्षा अलंकार होता है।
Utpreksha Alankar के उदाहरण ;- नेत्र मानो कमल हैं। ।

उत्प्रेक्षा अलंकार चे उदाहरण मराठी

ती गुलाबी उषा म्हणजे परमेश्वराचे प्रेम जणू!

उत्प्रेक्षा अलंकार की पहचान

इस प्रकार के अलंकार में मनु, जनु, जनहु, जानो, मानहु मानो, निश्चय, ईव, ज्यों आदि शब्द आते हैं।

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