Vakya ke kitne bhed hote hain Puri jaankari

वाक्य वे जिनके पुरे होने के बाद ही किसी बात को सही से समझ सकते है Vakya ke kitne bhed hote hain समझने के लिए हमे हिंदी व्याकरण को पढ़ना होगा जिससे हमे वाक्य के बारे में पता चल सकेगा

वाक्य का उपयोग हिंदी व्याकरण में इस तरह से बताया गया है

तो आइये वाक्य के बारे में पूरी जानकारी लेते है

Vakya ke kitne bhed hote hain

अर्थ और रचना के आधार पर वाक्य के दो भेद होते है जो की निम्नलिखित इस प्रकार से है

1. अर्थ के आधार पर

अर्थ के आधार पर 8 प्रकार के वाक्य होते है विधानवाचक वाक्य, निषेधवाचक वाक्य, प्रश्नवाचक वाक्य, विस्म्यादिवाचक वाक्य, आज्ञावाचक वाक्य, इच्छावाचक वाक्य, संकेतवाचक वाक्य, संदेहवाचक वाक्य।

विधानवाचक वाक्य

विधानवाचक वाक्य वे वाक्य होते है जिनसे किसी प्रकार की जानकारी प्राप्त होती है

उदारण के लिए ;-

  • मैं कल गुड़गांव गया था
  • कोरोना का जन्म चीन में हुआ था।
  • नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमन्त्री है।
  • राहुल द्रविड़ एक अच्छे खिलाडी है।
  • कोरोना एक महामारी है।
  • बिजली पानी से बनती है।
  • शिवम का गांव चेन्नई में है।

यहाँ पर अपने देखा होगा की सभी वाक्यों के जरिये कुछ न कुछ जानकारी देने की कोशिश की गयी है, जिससे यह पता चलता है की यह सभी वाक्य विधानवाचक वाक्य है।

निषेधवाचक वाक्य

वे वाक्य जिनसे कार्य के न होने का भाव प्रकट हो रहा हो वे वाक्य निषेधवाचक वाक्य कहलाते है

उदारण के लिए ;-

  • सीता ने रात से कुछ नहीं खाया।
  • वह कल भी स्कूल नहीं गयी।
  • जीवन का भाई ईश्वर नहीं है।
  • सिवा का घर भारत में नहीं है।
  • तुम कल वह नहीं गए।

इन सभी वाक्यों में किसी न किसी कार्य के न होने का बोध हो रहा है तो यह सभी वाक्य निषेधवाचक वाक्य है।

प्रश्नवाचक वाक्य

ऐसे वाक्य जिनके द्वारा कोई प्रश्न पूछा जा रहा हो तो वे प्रश्नवाचक वाक्य कहलाते है

उदाहरण के लिए;-

  • तुम कहा जा रहे हो ?
  • वे कैसे काम कर सकते है ?
  • राम खाना क्यों नहीं खाया ?
  • सीता पढ़ने कब गयी ?
  • क्या तुम झूठ बोल रहे हो ?
  • वह कहा जा रही है ?
  • क्या सीता राम से प्रेम करती है ?

ऊपर के दिए गए वाक्यों के जरिये प्रश्न पूछे जा रहे है अथवा प्र्शन का बोध हो रहा है इसलिए यह सभी वाक्य प्रश्नवाचक वाक्य है

विस्म्यादिवाचक वाक्य

जिन वाक्यों से किसी गहरी अनुभूति का बोध हो उन्हें विस्म्यादिवाचक वाक्य कहते है

उदाहरण के लिए;-

अहा! कितना मधुर गीत है।
ओह! कितना ठंडा पानी है
अहा ! यह रात सुहानी है।
बल्ले – बल्ले! भारत जीत गया।

यह सभी वाक्य विस्म्यादिवाचक वाक्य है

आज्ञावाचक वाक्य

जिन वाक्यों के द्वारा किसी को आदेश दिया जाता है या आदेश का बोध होता है वे आज्ञावाचक वाक्य कहलाते है

उदाहरण के लिए;-

  • क्या मैं इसे ले सकता हूँ ?
  • तुम इसे लेकर आओ।
  • तुम यह खाना खा सकते हो।
  • रीना तुम मेरे घर आ सकती हो।
  • स्वान क्या में भी खेल सकता हूँ।

यहाँ ऊपर दिए गए वाक्यों में से आज्ञा मांगने व आज्ञा देने जैसा बोध हो रहा है इसलिए यह सभी वाक्य आज्ञावाचक वाक्य है

इच्छावाचक वाक्य

ऐसे वाक्य जिनके द्वारा इच्छा, आशीर्वाद, या आकांछा का बोध हो उन वाक्यों को इच्छावाचक वाक्य कहते है

उदाहरण के लिए;-

  • मुझे यह खाने की इच्छा हो रही है
  • मुझे पानी पीना है
  • भगवान् तुम्हारा भला करे।
  • काश मैं इस साल पास हो जाता।
  • काश रीना मेरी हो जाती।

इन सभी वाक्यों में आप देख सकते है की इसमें किसी न किसी प्रकार की इच्छा या आकांछा का बोध हो रहा है और कुछ वाक्य में आशीर्वाद देने का भी बोध हो रहा है

जिससे की पता चलता है की यह सभी वाक्य इच्छावाचक वाक्य है।

संकेतवाचक वाक्य

जिन वाक्यों के जरिये किसी भी प्रकार का संकेत मिलने का बोध होता है वे वाक्य संकेतवाचक वाक्य कहलाते है

उदाहरण के लिए;-

  • वे उधर जा रहे है।
  • तुम इधर बैठो।
  • सोनी का बैग इधर है।
  • महेश की किताब उधर है।

इन सभी वाक्यों में संकेत का बोध हो रहा है इसलिए यह संकेत वाचक वाक्य है।

संदेहवाचक वाक्य

ऐसे वाक्य जिनके जरिये किसी भी प्रकार का संदेह या शक का भाव प्रकट हो उसे संदेहवाचक वाक्य कहते है

उदाहरण के लिए;-

  • तुम चोर हो सकते हो।
  • वीणा पानी शायद पि ली होगी।
  • अनुमान है की वो घर जा चुकी होगी।
  • तुम कैसे कर सकते हो।
  • यह तुमसे नहीं हो पायेगा।

यह सभी वाक्यों में संदेह का बोध हो रहा है जिससे की यह ज्ञात होता है की या सभी वाक्य संदेहवाचक वाक्य है।

2. रचना के आधार पर

रचना के आधार पर वाक्य तीन प्रकार के होते है सरल वाक्य, संयुक्त वाक्य, मिश्रित वाक्य

सरल वाक्य

जिस वाक्य में केवल एक ही क्रिया हो, वह सरल या साधारण वाक्य कहलाता है।

संयुक्त वाक्य

जब दो अथवा दो से अधिक सरल या साधारण वाक्य किसी सामानाधिकरण योजक  से जुड़े होते हैं जैसे – एवम्, तथा , या, वा, अथवा, लेकिन, किन्तु, परन्तु आदि, हो तो वह संयुक्त वाक्य कहलाता हैं।

उदाहरण के लिए –

  • मोहन स्कूल से आया लेकिन खेलने चला गया।
  • इसे तुम करो या तुम्हारा भाई।
  • तुम यहाँ से जाओ अन्यथा तुम्हे भी खेलना पड़ेगा।

इस वाक्य के चार प्रकार होते हैं  संयोजक संयुक्त वाक्य, विभाजक संयुक्त वाक्य, विरोधसूचक संयुक्त वाक्य, परिमाणवाचक संयुक्त वाक्य,

मिश्रित वाक्य

जब दो अथवा दो से अधिक सरल या संयुक्त वाक्य किसी व्यधिकरण योजक से जुड़े होते हैं,जैसे ;- यदि, तो , जैसा,वैसा, क्योंकि, इसलिए , यद्यपि, तथापि, कि आदि तो वह मिश्रित वाक्य कहलाता है।

उदाहरण के लिए ;-

  • तुम लोग लड़ोगे तो चोट लग जाएगी।
  • सीमा नहीं पढ़ोगी तो फेल हो जायेगी।
  • मेरे जैसा तुमने भी कपडे पहने है

मिश्रित वाक्य के दो भेद होते हैं

प्रधान  उपवाक्य

किसी वाक्य में जो उपवाक्य किसी पर आश्रित नहीं होता अर्थात् स्वतंत्र होता है एवम् उसकी क्रिया मुख्य होती है , वह मुख्य या प्रधान उपवाक्य कहलाता है।

उदाहरण के लिए ;-

सिवा ने कहा की वह लखनऊ जायेगा।

इस वाक्य में शिवा ने कहा प्रधान उपवाक्य है।

आश्रित उपवाक्य

किसी वाक्य में जो उपवाक्य दूसरे उपवाक्य पर निर्भर होता है अर्थात् स्वतंत्र नहीं होता है एवम् किसी न किसी व्यधिकरण योजक से जुड़ा होता है , वह आश्रित उपवाक्य कहलाता है।

उदाहरण के लिए ;-

सिवा ने कहा की वह लखनऊ जायेगा

इस वाक्य में वह लखनऊ जायेगा आश्रित उपवाक्य है।

आश्रित उपवाक्य के तीन भेद होते हैं

संज्ञा आश्रित उपवाक्य

किसी वाक्य में जो आश्रित उपवाक्य किसी दूसरे (प्रधान) उपवाक्य की संज्ञा हो अथवा कर्म का काम करता हो , वह संज्ञा आश्रित उपवाक्य कहलाता है। यह ‘कि’ योजक से जुड़ा रहता है।

उदाहरण के लिए ;-

रामदेव बाबा ने कहा है कि प्रतिदिन योग करना चाहिए। 

इस वाक्य में ‘प्रतिदिन योग करना चाहिए।’ संज्ञा आश्रित उपवाक्य है। क्योंकि यह उपवाक्य ‘कि’ योजक से तो जुड़ा ही है

साथ ही प्रधान उपवाक्य ‘रामदेव बाबा ने कहा है’ के ‘क्या कहा है?’ का जवाब भी है , अर्थात् कर्म भी है। अत: यह संज्ञा आश्रित उपवाक्य है।

विशेषण आश्रित उपवाक्य

किसी वाक्य में जो आश्रित उपवाक्य किसी दूसरे (प्रधान) उपवाक्य के संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताता हो ,वह विशेषण आश्रित उपवाक्य कहलाता है।

यह ‘जो ,जिस, जिन’ योजकों से आरम्भ होता है।

उदाहरण के लिए ;-

जो दुबला – पतला लड़का है उसे कमज़ोर मत समझो ।

क्रियाविशेषण आश्रित उपवाक्य

किसी वाक्य में जो आश्रित उपवाक्य किसी दूसरे(प्रधान) उपवाक्य के क्रिया की विशेषता बताता हो , वह क्रियाविशेषण आश्रित उपवाक्य कहलाता है।

यह ‘जब , जहाँ, जैसे , जितना’ योजकों से आरम्भ होता है।

उदाहरण के लिए ;-

जितना कहा जाय , उतना ही किया करो।

वाक्य के प्रमुख गुण ;-

वाक्य के प्रमुख गुण नीचे दिए गए हैं

  • सार्थकता : वाक्य के सभी शब्द सार्थक होने चाहिए अर्थात हर शब्द का एक अर्थ होना चाहिए।
  • योग्यता : वाक्य के शब्द सार्थक होने के साथ-साथ सार्थक अर्थ देने की योग्यता भी रखते हों।
  • आसन्ति : वाक्यों के शब्दों को बोलने और लिखने में निरंतरता हो।
  • आकांक्षा : वाक्य में किसी भी शब्द की कमी का अहसास न हो। अर्थात ऐसे शब्द की कमी नहीं हो, जिसके अर्थ के बिना वाक्य की पूर्णता ना हो। वाक्य में प्रयुक्त शब्दों का अर्थ अपने आप में पूर्ण होना चाहिए और वह वाक्यों के उद्देश्य को पूर्ण करते हों।
  • पदक्रम : वाक्य के सभी शब्द उचित पद-क्रम में हों, जिससे वाक्य एक सार्थक अर्थ प्रस्तुत करता हो और व्याकरण की दृष्टि से भी पूर्ण हो।
  • अन्वय : वाक्य में जो भी कर्ता, क्रिया और कर्म का प्रयोग किया जाए, उनमें आपस में तालमेल होना चाहिए।

Most Asked Q&A

वाक्य के कितने भेद होते हैं

अर्थ और रचना के आधार पर दो भेद होते है

अर्थ की दृष्टि से वाक्य कितने प्रकार के होते हैं

रचना के आधार पर 8 भेद होते हैं, 1. विधान वाचक वाक्य, 2. निषेधवाचक वाक्य, 3. प्रश्नवाचक वाक्य, 4. विस्म्यादिवाचक वाक्य, 5.आज्ञावाचक वाक्य, 6. इच्छावाचक वाक्य, 7. संकेतवाचक वाक्य, 8. संदेहवाचक वाक्य

मिश्र वाक्य के कितने भेद होते हैं?

मिश्र वाक्य के 2 भेद होते हैं, 1. प्रधान  उपवाक्य 2. आश्रित उपवाक्य

आदेश से युक्त वाक्य को क्या कहते हैं?

आदेश से युक्त वाक्य को आज्ञावाचक वाक्य कहते हैं?

रचना के आधार पर कितने भेद होते हैं?

रचना के आधार पर 3 भेद होते हैं, 1. सरल वाक्य, 2. संयुक्त वाक्य, 3. मिश्र वाक्य

संकेतवाचक वाक्य क्या है?

जिन वाक्यों के जरिये किसी भी प्रकार का संकेत मिलाने का बोध होता है वे वाक्य संकेतवाचक वाक्य कहलाते है

वाक्य के मुख्य अंग कितने होते हैं

अर्थ और रचना के आधार पर वाक्य के दो भेद होते है

वाक्य के प्रकार होते है

अर्थ और रचना के आधार पर वाक्य के प्रकार भेद होते है

वाक्य के प्रमुख गुण कितने होते हैं

वाक्य में प्रमुख गुण निम्नलिखित होते हैं
सार्थकता 
योग्यता 
आसन्ति 
आकांक्षा
पदक्रम
अन्वय

गुजारिश

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